Description

“समाधि में साधक मरता है स्वयं, और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है, वह जान लेता है इस सत्य को कि मैं हूं अलग, शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, और जीवन का अनुभव शुरू हो गया। मृत्यु की समाप्ति और जीवन का अनुभव एक ही सीमा पर होते हैं, एक ही साथ होते हैं। जीवन को जाना कि मृत्यु गई, मृत्यु को जाना कि जीवन हुआ। अगर ठीक से समझें तो ये एक ही चीज को कहने के दो ढंग हैं। ये एक ही दिशा में इंगित करने वाले दो इशारे हैं।”—ओशो

मृत्यु से अमृत की ओर ले चलने वाली इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:
* मृत्यु और मृत्यु-पार के रहस्य
* सजग मृत्यु के प्रयोग
* निद्रा, स्वप्न, सम्मोहन व मूर्च्छा के पार — जागृति
* सूक्ष्म शरीर, ध्यान व तंत्र-साधना के गुप्त आयाम

अनुक्रम
#1: ध्याआयोजित मृत्यु अर्थात न और समाधि के प्रायोगिक रहस्य
#2: आध्यात्मिक विश्व आंदोलन—ताकि कुछ व्यक्ति प्रबुद्ध हो सकें
#3: जीवन के मंदिर में द्वार है मृत्यु का
#4: सजग मृत्यु और जाति-स्मरण के रहस्यों में प्रवेश
#5: स्व है द्वार—सर्व का
#6: निद्रा, स्वप्न, सम्मोहन और मूर्च्छा से जागृति की ओर
#7: मूर्च्छा में मृत्यु है और जागृति में जीवन
#8: विचार नहीं, वरन् मृत्यु के तथ्य का दर्शन
#9: मैं मृत्यु सिखाता हूं
#10: अंधकार से आलोक और मूर्च्छा से परम जागरण की ओर
#11: संकल्पवान—हो जाता है आत्मवान
#12: नाटकीय जीवन के प्रति साक्षी चेतना का जागरण
#13: सूक्ष्म शरीर, ध्यान-साधना एवं तंत्र-साधना के कुछ गुप्त आयाम
#14: धर्म की महायात्रा में स्वयं को दांव पर लगाने का साहस
#15: संकल्प से साक्षी और साक्षी से आगे तथाता की परम उपलब्धि

About the Author 

ओशो एक ऐसे आध्यात्मिक गुरू रहे हैं, जिन्होंने ध्यान की अतिमहत्वपूर्ण विधियाँ दी। ओशो के चाहने वाले पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। इन्होंने ध्यान की कई विधियों के बारे बताया तथा ध्यान की शक्ति का अहसास करवाया है।हमें ध्यान क्यों करना चाहिए? ध्यान क्या है और ध्यान को कैसे किया जाता है। इनके बारे में ओशो ने अपने विचारों में विस्तार से बताया है। इनकी कई बार मंच पर निंदा भी हुई लेकिन इनके खुले विचारों से इनको लाखों शिष्य भी मिले। इनके निधन के 30 वर्षों के बाद भी इनका साहित्य लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है। ओशो दुनिया के महान विचारकों में से एक माने जाते हैं। ओशो ने अपने प्रवचनों में नई सोच वाली बाते कही हैं। आचार्य रजनीश यानी ओशो की बातों में गहरा अध्यात्म या धर्म संबंधी का अर्थ तो होता ही हैं। उनकी बातें साधारण होती हैं। वह अपनी बाते आसानी से समझाते हैं मुश्किल अध्यात्म या धर्म संबंधीचिंतन को ओशो ने सरल शब्दों में समझया हैं।

Additional information

Dimensions 21 × 13 × 1 cm
Binding

Paperback

ISBN

978-8171824090

Language

Hindi

Pages

380

Publication date

1 January 2007

Publisher

Diamond Pocket Books

Writer

Osho

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