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Mrityu Mere Dwar Per by Khushwant Singh

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यह पुस्तक अंग्रेजी के मशहूर लेखक खुशवन्त सिंह की पुस्तक ‘डेथ एट माई डोरस्टेप: ओबिट्युअरीज’ का अनुवाद है जिसमें उन्होंने कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए मृत्यु के विषय में अपना नज़रिया व्यक्त किया है। पुस्तक के पहले खंड में उन्होंने दलाई लामा एवं आचार्य रजनीश के मृत्यु के बारे में विचारों को रखा है |

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Description

यह पुस्तक अंग्रेजी के मशहूर लेखक खुशवन्त सिंह की पुस्तक ‘डेथ एट माई डोरस्टेप: ओबिट्युअरीज’ का अनुवाद है जिसमें उन्होंने कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए मृत्यु के विषय में अपना नज़रिया व्यक्त किया है। पुस्तक के पहले खंड में उन्होंने दलाई लामा एवं आचार्य रजनीश के मृत्यु के बारे में विचारों को रखा है और बुढ़ापा, मृत्यु का अनुभव, मृत्यु के पश्चात् जीवन और मृतकों से ज्ञान के बारे में काफी दिलचस्प अन्दाज़ में लिखा है। पुस्तक के दूसरे खंड में कई हस्तियों की मृत्यु के पश्चात् लिखी गई श्रद्धांजलियाँ जिनमें जेड.ए. भुट्टो, -संजय गांधी, माउंटबेटन, रजनी पटेल, धीरेन भगत, प्रभा दत्त, हरदयाल, मुल्कराज आनन्द, नीरद बाबू, बलवन्त गार्गी, फैज़ अहमद फैज़, आर.के. नारायण, प्रोतिमा बेदी, नरगिस दत्त, अमृता शेरगिल, भीष्म साहनी सहित अपनी दादी माँ, राज-विला के छज्जू राम और अपने कुत्ते सिम्बा के अलावा अपने ऊपर भी समाधि लेख लिखा है। इस पुस्तक को पढ़ते हुए खुशवन्त सिंह के चुटीले और खिलंदड़े अन्दाज की झलक मिलेगी और उनकी तटस्थता पाठकों को बेहद प्रभावित करे.

 

About the Author

जन्म: 15 अगस्त, 1915, हडाली (अब पाकिस्तान में)। शिक्षा: लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल.एल.बी.। उपलब्धियाँ: 1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत की। विभाजन के बाद भारत की ‘राजनयिक सेवा’ के अन्तर्गत कनाडा में ‘इन्फॉर्मेशन अफसर’ तथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के ‘प्रेस अटैची’ रहे। कुछ वर्षों तक प्रिंस्टन तथा स्वार्थमोर विश्वविद्यालयों में अध्यापन भी किया। भारत लौटकर नौ वर्षों तक इलस्ट्रेटेड वीकली तथा तीन वर्षों तक हिन्दुस्तान टाइम्स का कुशल सम्पादन किया। 1980 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। 1974 में पद्मभूषण की उपाधि मिली, जिसे ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के खिलाफ गुस्सा जताते हुए लौटा दिया। तीस से अधिक पुस्तकें, जिनमें प्रमुख हैं: ट्रेन टु पाकिस्तान, हिस्ट्री ऑफ सिख्स के दो खंड तथा रंजीत सिंह। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तकें-पाकिस्तान मेल, मेरा लहुलूहान पंजाब, प्रतिनिधि कहानियाँ, सच प्यार और थोड़ी से शरारत, मृत्यु मेरे द्वार पर । निधन: 20 मार्च, 2014.

Additional information

Dimensions 25 × 20 × 4 cm
Binding

Paperback

ISBN

978-9388933636

Language

Hindi

Pages

191

Publication date

1 November 2019

Publisher

‎ Rajkamal Prakashan

Writer

Khushwant Singh

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