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Tab Aur Ab by Gurudutt
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तब और अब उपन्यास में लेखक की दृष्टि हमारी दो पीढ़ियों पर टिकी है। एक पिछली पीढ़ी, जिसके अपने कुछ गुण, कुछ संस्कार थे जो उन्हें जोखिम उठाकर भी थामे रहती थी और दूसरी आज की पीढ़ी, जो बदली हुई परिस्थिति में घिरी हुई है और अपना संतुलन खो रही है। अनेक घटनाओं और पात्रों के ज़रिए लेखक ने हमारे समय का एक यथार्थ किंतु पूर्ण चित्र खींच दिया है।
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Description
About the Author
गुरुदत्त स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी के साथ-साथ हिंदी के महान उपन्यासकार थे। विज्ञान के विद्यार्थी और पेशे से वैद्य होने के बावजूद वे बीसवीं शती के एक ऐसे सिद्धहस्त लेखक थे, जिन्होंने लगभग दो सौ उपन्यास, संस्मरण, जीवनचरित आदि का सृजन किया और भारतीय इतिहास, धर्म, दर्शन, संस्कृति, विज्ञान, राजनीति और समाजशास्त्र के क्षेत्र में भी अनेक उल्लेखनीय शोध-कृतियाँ दीं। राष्ट्रसंघ के साहित्य-संस्कृति संगठन यूनेस्को के अनुसार गुरुदत्त 1960-1970 के दशकों में हिंदी साहित्य में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लेखक रहे हैं।
गुरुदत्त को क्रांतिकारियों का गुरु भी कहा जाता है। जब ये लाहौर के नेशनल कॉलेज में हेडमास्टर थे, तब सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु इनके सबसे प्रिय शिष्य थे।
गुरुदत्त को क्रांतिकारियों का गुरु भी कहा जाता है। जब ये लाहौर के नेशनल कॉलेज में हेडमास्टर थे, तब सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु इनके सबसे प्रिय शिष्य थे।
Additional information
| Dimensions | 19 × 12 × 1 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-0143477907 |
| Language | Hindi |
| Pages | 246 |
| Publication date | 16 August 2025 |
| Publisher | Penguin Swadesh |
| Writer | Gurudutt |



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