Description
एक मोहब्बतनामा, एक तहज़ीबनामा, एक दिल्लीनामा।
कई चाँद थे सर-ए-आसमान सिर्फ एक उपन्यास नहीं, बल्कि 18वीं-19वीं सदी के दिल्ली की ज़िंदगी और उर्दू साहित्य की रूह को महसूस करने का ज़रिया है।
इस किताब में आप पाएँगे:
- ग़ालिब, ज़ौक, दाग़ और बहादुर शाह ज़फ़र जैसे असली किरदारों से जुड़ी बेमिसाल दास्तानें
- हिंद-इस्लामी तहज़ीब, अदबी समाज और अंग्रेज़ी राज के दौर में बदलती संस्कृति का दस्तावेज़
- राजपूताना से लेकर दिल्ली के लाल किले तक की एक ऐतिहासिक यात्रा, जिसमें मोहब्बत, अदब और जज़्बात एक साथ चलते हैं
- शम्सुर रहमान फारूकी की लेखनी में छुपी अल्फ़ाज़ की जादूगरी और ग़ज़लों-नज़्मों की दुनिया







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