खंडित आजादी – कोबाड गांधी
मुझे बिल्कुल अन्दाजा नहीं था कि यह एक अण्डरट्रायल (विचाराधीन कैदी) के रूप में मेरे उस दस साल लम्बे सफ़र की शुरुआत थी जी मुझे देश के विभिन्न हिस्सों के पाँच राज्यों में स्थित सात जेलों में ले जाने वाला था। मैं बासठ साल का था और प्रोस्ट्रेट ग्लैण्ड या पेशाब के तन्त्र से जुड़ी गम्भीर समस्या तथा हड्डियों और ऊँचे रक्तचाप से जुड़ी बीमारियों का जल्द से जल्द इलाज कराने के लिए मुम्बई से दिल्ली आया था।
मुझे अगवा करने की कार्रवाई वास्तव में गिरफ्तारी थी। और इलजाम क्या था? यह कि मैं गैरकानूनी घोषित की गयी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (माओवादी) का सदस्य था। साथ ही प्रसार माध्यम इस बात को प्रचारित कर रहे थे कि मैं तथाकथित रूप से इस पार्टी के उच्चतम नेताओं में से एक था। इसका सन्दर्भ जानना जरूरी है…
– इसी पुस्तक से
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