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Tujhse Naraz Nahi Zindagi (Autobiography) By Umakant Shukla
तुझसे नाराज़ नहीं ज़िन्दगी …
एक प्रशासक की प्रेरक आत्मकथा – उमाकान्त शुक्ल
यह आत्मकथा क्यों? क्यों एक प्रशासक, जो सारा जीवन सत्ता के करीब रहा और आयकर विभाग जैसे ताकतवर विभाग में रहा, उसकी आत्मकथा के क्या मायने? उसे लिखना चाहिए भी या नहीं क्योंकि इसके पहले तो उसने कभी कुछ लिखा नहीं। शायद साहित्यिक पुस्तकों को बहुत पढ़ा भी नहीं! लेकिन पुस्तकों को भले ही पर्याह्रश्वत मात्रा में न पढ़ा हो,चेहरों को सारा जीवन पढ़ा है और चेहरे भाषा के सबसे विश्वसनीय आधार हुआ करते हैं। चेहरे कई बार सक्वबन्धों के बनते-बिगड़ते आधार की पहचान करते हैं या यह भी कह सकते हैं कि सक्वबन्धों की वास्तविक पहचान के लिए चेहरों की भाषा का अध्ययन बहुत जरूरी होता है। (इसी पुस्तक से )
Books By Dr. Piyush Daiya”
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Tujhse Naraz Nahi Zindagi (Autobiography) By Umakant Shukla
| Author | Umakant Shukla |
|---|---|
| Language | Hindi |
| ISBN | 9.78938E+12 |
| Pages | 360 |
| Binding | Hardcover |
| Publication date | 01-01-2024 |





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