CHHAVA By Sambhaji Maharaj | May setu shop
Original price was: ₹995.00.₹749.00Current price is: ₹749.00.
‘छावा’ मराठी के प्रख्यात साहित्यकार शिवाजी सावन्त का बहुचर्चित ऐतिहासिक उपन्यास है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र सम्भाजी महाराज के संघर्षपूर्ण, साहसी और प्रेरणादायक जीवन का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है।
यह उपन्यास केवल एक ऐतिहासिक कथा नहीं, बल्कि एक ऐसे योद्धा की गाथा है जिसने विपरीत परिस्थितियों, राजनीतिक षड्यंत्रों और निरंतर संघर्षों के बीच अपने साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का अद्वितीय परिचय दिया। लेखक ने दुर्लभ और प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर सम्भाजी महाराज के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और बलिदान को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
शिवाजी सावन्त की सशक्त भाषा, गहन शोध और रोचक कथा-विन्यास इस कृति को ऐतिहासिक उपन्यासों की श्रेणी में विशिष्ट स्थान प्रदान करते हैं। ‘छावा’ पाठकों को मराठा इतिहास के गौरवशाली अध्याय से परिचित कराते हुए वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।
इतिहास, भारतीय संस्कृति और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह एक संग्रहणीय और अवश्य पठनीय कृति है।
Out of stock
Description
CHHAVA By Sambhaji Maharaj | May setu shop
लेखक परिचय : शिवाजी सावन्त
शिवाजी सावन्त मराठी साहित्य के अत्यंत लोकप्रिय और सशक्त कथा-शिल्पी थे, जिन्होंने भारतीय इतिहास, पुराण और सांस्कृतिक परम्पराओं को अपनी विशिष्ट रचनात्मक दृष्टि से नए आयाम प्रदान किए। उनका जन्म 31 अगस्त 1940 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले के आजरा गाँव में हुआ।
भारतीय साहित्य में उनकी पहचान मुख्यतः उनके कालजयी उपन्यास ‘मृत्युंजय’ से बनी, जो महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित है। यह उपन्यास भारतीय भाषाओं के सर्वाधिक चर्चित और लोकप्रिय उपन्यासों में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘छावा’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र सम्भाजी के संघर्षपूर्ण जीवन तथा ‘युगन्धर’ में भगवान श्रीकृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व का अद्भुत चित्रण किया है।
उपन्यासों के अलावा उन्होंने ‘संघर्ष’ (नाटक), ‘लढत’ (जीवनी) और ‘शेलका साज’ (ललित निबन्ध) जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ भी लिखीं। उनकी रचनाएँ गहन शोध, प्रभावशाली कथा-विन्यास और मानवीय संवेदनाओं की गहरी समझ के लिए विशेष रूप से प्रशंसित हैं।
साहित्य के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ का प्रतिष्ठित मूर्तिदेवी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। 18 सितम्बर 2002 को गोवा के मडगाँव में उनका निधन हुआ, किन्तु उनकी रचनाएँ आज भी भारतीय साहित्य के पाठकों को प्रेरित करती हैं।
शिवाजी सावन्त की कृतियाँ इतिहास, संस्कृति, दर्शन और मानवीय संघर्षों को समझने के लिए अमूल्य साहित्यिक धरोहर मानी जाती हैं।
Additional information
| Author | Shivaji Sawant |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-9355185990 |
| Language | Hindi |
| Pages | 856 |
| Publication date | 01-01-2016 |
| Publisher | Medha Publishing House |


Reviews
There are no reviews yet.