अर्थला (Arthla) | संग्राम-सिंधु गाथा का महाकाव्यात्मक उपन्यास
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विवेक कुमार ने जौनपुर, फैजाबाद, वाराणसी और इलाहाबाद में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की तथा बाद में मेरठ से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। कुछ समय तक निजी क्षेत्र में कार्य करने के पश्चात उन्होंने रचनात्मक और डिजिटल क्षेत्र की ओर कदम बढ़ाते हुए अपना ग्राफिक्स ब्लॉग शुरू किया। इतिहास, पौराणिक कथाओं और कल्पनाशील कथानकों में विशेष रुचि रखने वाले विवेक कुमार अपनी सशक्त लेखन शैली और गहन अध्ययन के माध्यम से पाठकों को रोमांचक एवं विचारोत्तेजक साहित्यिक अनुभव प्रदान करते हैं।
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Description
अर्थला एक भव्य पौराणिक एवं कल्पनाशील उपन्यास है, जो पाठकों को उस प्राचीन युग में ले जाता है जब देव, दानव, असुर और दैत्य अपनी शक्ति और साम्राज्य विस्तार के चरम पर थे। यह किसी एक नायक की कहानी नहीं, बल्कि संपूर्ण सभ्यता, संस्कृति, निर्माण और विनाश की महागाथा है।
मानव ने भौतिक ज्ञान में असाधारण प्रगति अवश्य की, परंतु उसके भीतर की महत्वाकांक्षा, लोभ, शक्ति-लालसा और वर्चस्व की प्रवृत्तियाँ युगों से समान बनी रही हैं। इसी संघर्ष ने देवों और असुरों के बीच अनेक युद्धों को जन्म दिया। संसाधनों पर अधिकार, आर्थिक शक्ति का विस्तार और सर्वोच्च बनने की चाह ने जंबूद्वीप को बार-बार विनाशकारी संघर्षों की आग में झोंक दिया।
लेकिन इस बार इतिहास स्वयं को दोहराने नहीं, बल्कि एक नए और अधिक भीषण अध्याय की ओर बढ़ रहा है—संग्राम-सिंधु। यह ऐसा महासंग्राम है जिसकी विनाशकारी शक्ति दस देवासुर संग्रामों से भी अधिक भयानक सिद्ध होने वाली है।
अर्थला केवल युद्ध और वीरता की कथा नहीं है, बल्कि यह देवशक्ति, अर्थव्यवस्था, सत्ता, राजनीति, संस्कृति और सभ्यता के मूल प्रश्नों को भी उजागर करती है। रहस्य, रोमांच, दर्शन और पौराणिक कल्पना का यह अनूठा संगम पाठकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखता है।
Additional information
| Author | Vivek Kumar |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | 448 |
| Publication date | 31 July 2021 |
| Publisher | Hind Yugm |



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