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Mere Manch Ki Sargam by Piyush Mishra

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जब होश सँभाला तो मैं सन् 1990 में अपने थियेटर ग्रुप ‘एक्ट-वन आर्ट ग्रुप, नई दिल्ली’ की बाँहों में था। उससे पहले अगर कुछ याद है तो चंद उँगलियों पर गिने जानेवाले दोस्त जो एक हथेली में ख़र्च हो जाएँगे, प्लस टू के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली में प्रवेश, सन् 1983 से 1986 तक वहाँ का प्रवास, ‘हैमलेट’, ‘नेक्रासोव’ और ‘मैन इक्वल्स मैन’, स्व. फ्रिट्ज बेनेविट्ज नाम के गुरु और श्री रंजीत कपूर और श्री नसीरुद्दीन शाह जैसे सम्मानित सीनियरों से मुलाक़ात, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल में 18 दिन की पेशेवर हवाखोरी, 1989 में मुंबई कूच और 1990 में दिल्ली वापसी। और उसके बाद ‘एक्ट-वन’ से निकाह, उससे तलाक़ और फिर से निकाह।

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Description

जब होश सँभाला तो मैं सन् 1990 में अपने थियेटर ग्रुप ‘एक्ट-वन आर्ट ग्रुप, नई दिल्ली’ की बाँहों में था। उससे पहले अगर कुछ याद है तो चंद उँगलियों पर गिने जानेवाले दोस्त जो एक हथेली में ख़र्च हो जाएँगे, प्लस टू के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली में प्रवेश, सन् 1983 से 1986 तक वहाँ का प्रवास, ‘हैमलेट’, ‘नेक्रासोव’ और ‘मैन इक्वल्स मैन’, स्व. फ्रिट्ज बेनेविट्ज नाम के गुरु और श्री रंजीत कपूर और श्री नसीरुद्दीन शाह जैसे सम्मानित सीनियरों से मुलाक़ात, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल में 18 दिन की पेशेवर हवाखोरी, 1989 में मुंबई कूच और 1990 में दिल्ली वापसी। और उसके बाद ‘एक्ट-वन’ से निकाह, उससे तलाक़ और फिर से निकाह।

इस संकलन में मेरी व्यक्तिगत शायरी या सिनेमा के गीत नहीं हैं। ये सिर्फ़ मेरे थियेटर के गीत हैं जिनको संगीतबद्ध या कम्पोज़ किया जा चुका है। इस संकलन में ये अपने ‘ओरिजिनल फ़ार्म’ में हैं और इन पर मुझसे ज़्यादा मेरे उन करोड़ों दोस्तों का हक़ है जिनकी बढ़ती हुई तादाद से मेरा ख़ुदा भी मुझे नहीं बचा सकता।

बहरहाल ये गीत उस दौर के नाम जिसमें मैंने बड़ा होना सीखा…।

…उन सबके नाम जिनको धोखा देकर मैंने ये जाना कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।

…उन सबके नाम जिनसे मिले धोखे ने मुझे माफ़ी देने के महान गुण से परिचित कराया!

About the author

पीयूष मिश्रा

परिचय मुमकिन नहीं, न ही उन्हें पसन्द है। दोस्तों में ‘पीयूष भाई’ छात्रों में ‘सर’। 1983 से 2003 तक दिल्ली में थियेटर किया। आजकल मुम्बई सिनेमा नगरी में व्यस्त हैं, इस उम्मीद के साथ कि बदलाव वहाँ भी होगा।

प्रकाशित कृतियाँ : ‘जब शहर हमारा सोता है’, ‘गगन दमामा बाज्यो’, ‘वो अब भी पुकारता है’, ‘सन् 2025’ (नाटक); ‘कुछ इश्‍क़ किया कुछ काम किया’ (शायरी और कविता-संग्रह); ‘तुम मेरी जान हो रजि़या बी’ (कविता-संग्रह); ‘मेरे मंच की सरगम’ (थियेटर के गीत); ‘आरम्भ है प्रचण्ड’ (गीत)।

Additional information

Dimensions 22 × 14 × 2 cm
Binding

Paperback

ISBN

9788126726479

Language

Hindi

Pages

192

Publication date

1 January 2014

Publisher

‎ Rajkamal Prakashan

Writer

Piyush Mishra

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