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नवीन रांगियाल उन कवियों में हैं,जिन्हे हिन्दी कविता का संसार उम्मीद और उत्सुकता से देख रहा है। नवीन अपनी कविताओं के भीतर एक ऐसा क्रोध रखकर चलते है, जो हाल की कविताओं में सहज रूप से नहीं दिखता। हालांकि इसके प्रदर्शन के लिए वह किसी तरह की सामाजिक,राजनीतिक विषयावली को नहीं पुचकारते, लेकिन कुछ सर्वमान्य रीतियों को दुत्कार कर कविता और मन के आँगन से बाहर अवश्य कर देना चाहते हैं।





















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