23 Lekhikayen Aur Rajendra Yadav
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23 Lekhikayen Aur Rajendra Yadav
अपने ढंग की अद्भुत पुस्तक है यह ’23 लेखिकाएं और राजेन्द्र यादव’ । शायद किसी भी भारतीय भाषा में अकेली । इसे गीताश्री के पत्रकार-जीवन की एक उपलब्धि भी कह सकते हैं । यहाँ गीता ने समय-समय पर लिखे गए समकालीन महिला-रचनाकारों के इम्प्रैशन (प्रभाव-चित्रों) का संयोजन किया है । कहीं ये साक्षात्कार हैं तो कहीं संस्मरण, कहीं राजेन्द्र जी के रचनाकार को समझने की कोशिश है तो कहीँ ‘हंस’ के संपादकीय, को लेकर उन पर बाकायदा मुकदमे । यहाँ अगर मन्नू भंडारी, मृदुता गर्ग, चित्रा मुद्गल, सुधा अरोडा, ममता कालिया, प्रभा खेतान, मैत्रेयी पुष्पा, अनामिका तथा कविता हैं तो निर्मला जैन, जयंती रंगनाथन, पुष्पा सक्सेना, वीना उनियाल और रचना यादव भी अपने वक्तव्यों के साथ उपस्थित है । राजेन्द्र यादव अपने समय के सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार, नई कहानी आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक और कथा-समीक्षा के विलक्षण व्याख्याकार हैं । इधर चौबीस वर्षों में तो ‘हंस’ के तूफानी विचारों ने हंगामा ही खड़ा कर दिया हैं–राजेन्द्र जी को खलनायक और माफिया डॉन या पता नहीं और क्या-क्या बना दिया । विवादास्पद होना जैसे उनकी स्थायी नियति है–‘हंस’ के माध्यम से उन्होंने स्त्री-दलित और अल्पसंख्यकों के पक्ष में जो जेहादी मुहिम चलाई है उसने निश्चय ही हिंदी के यथास्थितिवादी परंपरा-पोषकों की नींद हराम कर दी है । वे तर्क से नहीं, गालियों और आक्षेपों से राजेन्द्र जी के प्रश्नों का उत्तर देते हैं । मठाधीशों के लिए यह सचमुच बैचेन कर देने वाला सत्य है कि उनके देखते-देखते दलित और स्त्री-विमर्श आज साहित्य की केंद्रीय मुख्य धाराएँ हैं । राजेन्द्र यादव के इस विकट और अपने समय के सबसे जटिल व्यक्तित्व के विविध आयामों को समेटने की कोशिश करती हैं ये लेखिकाएँ गीताश्री के मंच से । किताबघर प्रकाशन की एक भव्य प्रस्तुति ।
Description
राजेन्द्र यादव हिंदी साहित्य के एक प्रमुख और प्रभावशाली कथाकार, संपादक और विचारक थे। वे नई कहानी आंदोलन के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उनकी लेखनी समाज के जटिल यथार्थ, विशेषकर स्त्री-विमर्श, वर्ग संघर्ष और सामाजिक असमानताओं को गहराई से उजागर करती है।
उनकी सबसे बड़ी पहचान सिर्फ एक लेखक के रूप में नहीं, बल्कि एक विचार-उत्तेजक संपादक के रूप में भी रही। उन्होंने हंस पत्रिका के माध्यम से नए लेखकों, खासकर महिला लेखिकाओं को एक मजबूत मंच दिया। वे पारंपरिक सोच को चुनौती देने और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर लिखने के लिए जाने जाते थे।
📖 “23 लेखिकाएँ और राजेन्द्र यादव” में उनकी यही सोच साफ झलकती है। इस पुस्तक में उन्होंने 23 महिला लेखिकाओं के लेखन, व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक योगदान पर चर्चा की है। यह किताब न केवल साहित्यिक समीक्षा है, बल्कि स्त्री लेखन को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है।
Additional information
| ISBN | 9788190722131 |
|---|---|
| Binding | Hardcover |
| Language | Hindi |
| Pages | 320 |
| Publication date | 1 January 2009 |
| Publisher | Kitabghar Prakashan |
| Writer | Rajendra Yadav |


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