AAG AUR PAANI
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भूमिका
यह किताब बनारस के आमंत्रण में डूबने और उससे बचकर निकल आने की गाथा है। जिंदा सभ्यता में योजना बनाकर दाखिल नहीं हुआ जाता। ठहरी हुई इमारतों के सामने से टहलते हुए गुज़रा जा सकता है, लेकिन बनारस हाथ पकड़कर पास बैठा लेने वाली एक धड़कती हुई आदत है। जब आप उसे देखते हैं, वह भी अपनी हज़ार आँखों से आपको देखता है।
इस अनंतता को भेदने की कोई रणनीति मेरे पास नहीं है। यह मेरी हड्डियों में है और इस बात का उत्सव आजीवन चलता रहेगा।
इस मेले में आप सबका स्वागत है।
– व्योमेश शुक्ल
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Description
बनारस असंभव जगह है । उसकी माप मुश्किल है । इस पार भी है , उस पार भी ।
राख में है और बालू में भी । खड़ा है और भाग रहा है । नींद मे है और जाग रहा है ।
आग और पानी का मुकाबला है बनारस । शोर के साथ संगीत की जुगलबंदी है ।
मंत्र और गलियों मे होड़ है । प्यार की सबसे कोमल कहानी का नायक पहलवान है ।
निर्गुण के गुण राम है और सगुण मस्जिद मे सोया है ।
-इसी किताब से
Additional information
| Author | Vyomesh Sukla |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-81-952549-3-4 |
| Language | Hindi |
| Pages | 124 |
| Publication date | 01-01-2024 |
| Publisher | Rukh publications |


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