– घूमना – एक ऐसा शब्द जिसे हर कोई अपनी लाइफ में अपनाना चाहता है, उम्र के अलग अलग पड़ाव पर अलग अलग तरह के दिक्कतों या बहानों के चलते हम कही नही जा पाते।कॉलेज से ही सोचते है जॉब लगने पर घूमूंगा लेकिन शादी, बच्चो और नौकरी आदि उलझनों में इस तरह से फंस जाते है कि ये सपना कभी हकीकत नही बन पाता।
– कुछ इसी तरह की मुश्किलों को दरकिनार कर और समाज द्वारा डाली गई बेड़ियों को तोड़ कर दुनिया को देखने और खुद की तलाश करने की कहानी है “आजादी मेरा ब्रांड”
– ये पुस्तक अनुराधा जी का यूरोप यात्रा का संस्मरण है। जो हरियाणा के एक गांव में रहती है उन्हें बचपन से ही “चेस” खेलना पसंद था उनकी ये हॉबी उन्हे नेशनल चैंपियन भी बना डाली। पुणे में पढ़ाई के दौरान और अपनी राजस्थान की यात्राओं के दौरान मिली लड़कियां कैसे इनपर अपना प्रभाव छोड़ती है कि इनका भी मन दुनिया घूमने को हो आता है। लेकिन एक ऐसे समाज में जहां लड़कियों का घर से निकलना ही उनके चरित्र पर उंगली उठा देता है। ऐसे समाज से निकलकर किस तरह उन्होंने अपनी यात्रा को शुरू किया और यूरोप के शहरो को जीया। इसी यूरोप यात्रा का संस्मरण है ये पुस्तक।
– लेखिका का ये पहला पुस्तक है लेकिन लगता है कि जैसे ढेरो पुस्तकों के लिखने का अनुभव इन्हे। पढ़ना शुरू करने पर किताब को रखने का मन ही नही करता। पुस्तक को पढ़कर लगता है की हम भी उनके साथ साथ चल रहे है हम भी उनके साथ दुनिया घूम रहे है। पुरुषो वाले भारतीय समाज में खुद को खोज पाना आसान नहीं है।
In stock
| Author | Anuradha Beniwal |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-8126728367 |
| Language | Hindi |
| Pages | 188 |
| Publication date | 1 January 2016 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
Reviews
There are no reviews yet.