Bakri By Vijay Pandit
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बकरी
(कृति मूल्यांकन : नाटक )
प्रधान सम्पादक :महेश आनन्द देवेन्द्र राज अंकुर
सम्पादक : विजय पण्डित
‘बकरी’ का कॉण्ट्रिब्यूशन ये था कि जो भी गुस्सा कल्चरली रिफ्लेक्ट होता था… उसको पॉलिटिकल थीम लेकर एक नाटक बनाया… सर्वेश्वर जी ने। लेकिन गांधी का जो ट्रस्टीशिप था गांधियन थॉट जो फेल हो रहा था… उसपर भी तो प्रहार है ये नाटक… सर्वेश्वरदयाल सक्सेना खुद गांधी के विचारों को मानते थे… वे दरअसल नेहरू से नाराज थे… कुछ मुद्दों पर वे गांधी से नाराज़ हो सकते थे बिकॉज गांधी चूजेन नेहरू… नेहरू… हमें डेमोलिश करने की नहीं डीकंस्ट्रक्ट करने की ज़रूरत थी। बिकॉज नेहरू से आगे बढ़ने की ज़रूरत थी, उसको डेमोलिश करने की ज़रूरत नहीं थी। ये डेमोलिश प्रोसेस बाद में एण्टी काँग्रेसिज्म के रूप में आया, जिसमें राजनारायण आदि जुड़ गये… बाद में इस एक्सपेरिमेण्ट को सब जानते हैं।
मैं ‘बकरी’ को बहुत आइडियालाइज नहीं करना चाहता। ‘बकरी’ की अपनी सीमाएँ हैं। इट्स अ पोलिटिकल सटायर, लेकिन तमाम राजनीतिक व्यंग्य में यह बहुत ही अच्छा राजनीतिक व्यंग्य है… क्योंकि सर्वेश्वर जी के पास सेंस ऑफ़ ह्यूमर है… इसलिए यह लम्बे समय तक सर्वाइव कर गया… लेकिन इसकी लिमिटेशन है।
– इसी पुस्तक से
Description
Bakri By Vijay Pandit
प्रधान सम्पादक
महेश आनन्द देवेन्द्र राज अंकुर
सम्पादक
विजय पण्डित
About the Author
विजय पण्डित
वाराणसी (अब सन्त रविदास नगर) के जगन्नाथपुर गाँव में 11 फरवरी, 1963 को जन्म। प्राथमिक शिक्षा गाँव में। उच्च शिक्षा इलाहाबाद वि.वि. और भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ। कृतियाँ: ‘रंगमंच और स्वाधीनता आन्दोलन’, ‘स्वाधीनता’ और ‘उन्नाव’, लोकनाट्य नौटंकी कुछ प्रश्न’, ‘पिस्तौल’, ‘सुनें छत्रपति’, ‘पूर्ण पुरुष’ (नाटक)। 100 से अधिक नाटकों का निर्देशन और मंचन। 30 से
अधिक फ़िल्मों और धारावाहिकों का लेखन। सम्मान/फेलोशिप : पुर्तगाली कवि फेर्नादो पेसोवा की डायरी पर लिखी फ़िल्म ‘अदिति सिंह’ का कांस फ़िल्म फ़ेस्टिवल, फ्रांस में प्रदर्शन। लिखित फ़िल्म ‘जोसेफ बॉर्न इन ग्रेस’ का ऑस्कर पुरस्कार हेतु एलिजिबिल केटेगरी में नामांकन। फ़िल्म ‘जोसेफ बॉर्न इन ग्रेस’ को ओटोरियो फ़िल्म फ़ेस्टिवल में लेखन के लिए पुरस्कार। संस्कृति विभाग, उ.प्र. द्वारा ‘रंगमंच और स्वाधीनता आन्दोलन’ विषय पर फ़ेलोशिप, भारत सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा नौटंकी-अध्ययन हेतु फ़ेलोशिप। दिल्ली सरकार की ‘साहित्य कला परिषद्’ द्वारा नाटक ‘पूर्ण पुरुष’ को मोहन राकेश सम्मान, 2003. उ.प्र. साहित्य सम्मेलन सम्मान, इलाहाबाद। पद्मश्री गुलाबबाई सम्मान, कानपुर। निराला साहित्य संगीत अकादमी सम्मान, उन्नाव। अभिनन्दिका आर्ट फॉर टेलीविजन एण्ड थिएटर, पुरी, ओड़िसा। डॉ. सुरेश चन्द्र अवस्थी सम्मान, लोक नाट्य हेतु, लखनऊ। ज्ञानदेव अग्निहोत्री रंग सम्मान। उर्मिल कुमार थपलियाल सम्मान, लखनऊ। श्री शारदापीठ कश्मीर द्वारा श्री शारदा शताब्दी सम्मान, 2023. सम्प्रति मुम्बई में रहकर लेखन।
Additional information
| Author | Vijay Pandit |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| ISBN | 978-93-6201-177-0 |
| Pages | 142 |
| Publication date | 01-02-2025 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |





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