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ग़ालिब छुटी शराब | Ghalib Chhuti Sharab

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ग़ालिब छुटी शराब प्रसिद्ध लेखक रवीन्द्र कालिया का बहुचर्चित और अत्यंत लोकप्रिय संस्मरण है। अपनी बेबाक शैली, आत्मस्वीकृतियों, विनोदप्रियता और अद्भुत पठनीयता के कारण यह पुस्तक हिंदी साहित्य की सर्वाधिक चर्चित कृतियों में शामिल है। लेखक ने इसमें अपने जीवन, संघर्षों, कमजोरियों, साहित्यिक संसार और शराब से जुड़ी स्मृतियों को पूरी ईमानदारी और निर्भीकता के साथ प्रस्तुत किया है। संवेदनशील, रोचक और आत्मकथात्मक लेखन का यह अनूठा उदाहरण पाठकों को अंत तक बांधे रखता है।

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Description

‘ग़ालिब छुटी शराब’ हिन्दी के प्रख्यात कथाकार रवीन्द्र कालिया की बहुचर्चित आत्मकथात्मक कृति है, जिसे इक्कीसवीं सदी की पहली बेस्टसेलर हिन्दी पुस्तकों में गिना जाता है। यह पुस्तक लेखक के जीवन के उन कठिन दिनों की कथा है, जब बीमारी, टूटती सेहत और जीवन की अनिश्चितताओं ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था। ऐसे विषम समय में लिखी गई यह कृति आत्मस्वीकृति, आत्मविश्लेषण और जीवन के प्रति अदम्य जिजीविषा का दुर्लभ दस्तावेज बन जाती है।

रवीन्द्र कालिया अपनी विशिष्ट शैली, विनोदप्रियता और बेबाक लेखन के माध्यम से अपने जीवन के सुख-दुख, मित्रताओं, साहित्यिक संसार, कमजोरियों और संघर्षों को पूरी ईमानदारी से पाठकों के सामने रखते हैं। यही कारण है कि यह पुस्तक केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, जीवंत और प्रेरक जीवन-कथा बन जाती है।

अपनी सहज भाषा, रोचक प्रसंगों और आत्मालोचन की अद्भुत क्षमता के कारण ‘ग़ालिब छुटी शराब’ पाठकों को पहली पंक्ति से ही बांध लेती है। यह पुस्तक जीवन की विडम्बनाओं, मानवीय कमजोरियों और आत्मबोध की यात्रा को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

हिन्दी साहित्य के पाठकों, शोधार्थियों और आत्मकथात्मक लेखन में रुचि रखने वालों के लिए यह एक अनिवार्य और संग्रहणीय कृति है, जो बार-बार पढ़े जाने का आग्रह करती है।

Additional information

Author

Ravindra Kalia

Binding

Paperback

ISBN

978-9387330085

Language

Hindi

Pages

304

Publication date

01-01-2024

Publisher

Vani Prakashan

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