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Hawa Jaldi Mein Hai
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मेरे तो दर्द भी औरों के काम आते हैं में रो पडूँ तो कई लोग मुस्कुराते हैं कागज़ की एक नाव अगर पार हो गई इसमें समन्दरों की कहाँ हार हो गई इन चाहतों का कोई नतीजा नहीं तो क्या हम तो उसी के हैं वो हमारा नहीं तो क्या ख़ुद पे इस और क़यामत नहीं होगी हम से दूसरी बार मोहब्बत नहीं होगी हम से
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Description
About the Author
डॉ. तारिक़ क़मर का जन्म जिगर मुरादाबादी के इलाके के क़स्बे सम्भल में मरहूम अक़ील अहमद साहब के यहाँ 01 जुलाई 1974 को हुआ। तारिक़ साहब को शाइरी का फ़न विरासत में मिला ,इनके वालिद और इनके दादा भी शाइर थे। तारिक़ कमर की शुरूआती पढाई संभल में हुई , फिर इन्होने मुख्तलिफ़ – मुख्तलिफ़ जगहसे अपनी तालीम पूरी की जैसे कानपुर ,मुरादाबाद और मुस्लिम यूनिवर्सिटी ,अलीगढ़। लफ़्ज़ों को शाइरी में बरतने के मामले में तारिक़ फ़िज़ूल ख़र्ची नहीं करते पर पढाई के मामले में तारिक़ रती-भर भी कंजूस नज़र नहीं आते। तारिक़ क़मर इस छोटी सी उम्र में उर्दू, अंग्रेज़ी और पत्रकारिता एंड मॉस कम्युनिकेशन में स्नात्तकोतर है। “नई ग़ज़ल में इमेज़री ” पे तारिक़ ने रूहेलखंड विश्वविद्यालय ,बरेली से शोध कर पी. एच .डी की
Additional information
| Dimensions | 20 × 14 × 1 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-9388241984 |
| Language | Hindi |
| Pages | 186 |
| Publication date | 5 August 2019 |
| Publisher | Manjul Publishing House |
| Writer | Tariq Qamar |


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