किताब का शिर्षक ही कुछ ऐसा है की ज्यादा नहीं तो थोड़ा बहुत तो आप समझ ही गये होंगे।
इश्क़ में शहऱ होना का मतलब क्या खूब समझाया है रविश कुमार जीने इसमें ऐसी कई लघु प्रेम कथाएं हैं जो आप से सायद संबंधित हो हालांकि ये बात अलग है की यहां सारी बातों में दिल्ली के गलीयारें यां वहां की विख्यात जगहों का नाम है…
लेकिन यहां की हर कथा प्रेमी-प्रेमिका ओकी व्यथा को दर्शाती है..
इश्क़ में शहऱ होना मतलब यही तो है की शहऱ के हर उस कोने से प्यार जहां कभी आप अपनी किसी खास दोस्त के साथ कुछ प्यार भरे लम्हें बिताए हो…
शहऱ के हर कोने से आप वाकिफ़ हो जाते हैं जब आप किसी से इश्क़ करने लगते हैं क्योंकि आज कल इश्क़ वो एकांत और शांत लगभग चूना है जहां दोनों एक-दूसरे की घड़कने सुन सकें, प्यार भरी बातों में कोई भी किसी भी प्रकार का अशांति न हो….
प्रेम की गहराईयां कब हमें अपने ही शहऱ के हर कोने से मिलवा देती है पता ही नहीं चलता है आप हर उस कोने से वाकिफ़ हो जाते हैं जहां शांति और कोइ रोक-टोक का डर न हो…न किसी के देखने का , न किसी से पहेचाने जाने का.
हम सब प्रेम के सागर में तैर रहे हैं लेकिन प्रेम किस से है वो अपनी अपनी पसंद होती है।
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| Author | Ravish Kumar |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-8126727674 |
| Language | Hindi |
| Pages | 90 |
| Publication date | 1 February 2015 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
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