JUNGLE KI KAHANIYAN by Sunayan Sharma
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जंगल की कहानियाँ – सुनयन शर्मा
एक जमाना था जब जंगल व शिकार की कहानियाँ हिन्दी साहित्य का अविभाज्य हिस्सा हुआ करती थीं। लेकिन देखते देखते ही जीवन की इस आपाधापी में साहित्य की यह विधा कहाँ गायब हो गयी पता ही नहीं चला। सच तो यह है कि अँग्रेजी साहित्य भी इस मार से बच नहीं सका। लेखक, जो भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे हैं, ने इस पुस्तक के जरिये इस विलुप्त- प्राय विधा को पुनर्जीवित करने का सार्थक प्रयास किया है। लेखक ने अपने लम्बे वन सेवा काल में अर्जित अनुभवों को इस पुस्तक में अत्यन्त रोचक कथानक के रूप में इस प्रकार से पिरोया है कि पाठक न सिर्फ लेखक के साथ वन्यजीवों से भरपूर विभिन्न जंगलों की सैर करता महसूस करता है बल्कि स्वयं को वन्यजीवों के अवैतनिक संरक्षक के रूप में देखने लगता है। यह पुस्तक इस दृष्टिकोण से भी विशिष्ट है कि जहाँ पहले की कहानियों में वन्यजीवों के शिकार के लिए चलने वाली बन्दूकों का वर्णन होता था वहीं इस पुस्तक में ऐसे दुर्दान्त शिकारियों की बन्दूकों को खामोश करने व उन्हें सीखचों के पीछे पहुँचाने के रोचक किस्से हैं। आम आदमी जंगल व वहाँ काम करने वाले लोगों की परिस्थितियों के बारे में बहुत कम जानकारी रखता है लेकिन इस अनजान क्षेत्र के बारे में जानकारी प्राप्त करने की प्रबल उत्कण्ठा उसके मन में सदा रहती है। लेखक ने वन सेवा के अपने विशद अनुभव को कहानियों में इस रोचकता के साथ पिरोया है कि हर कहानी न सिर्फ वन और वहाँ के जीवों के सौन्दर्य-रोमांच से पाठक को सराबोर कर देती है बल्कि उसे इस विशाल अद्भुत संसार के अबूझ रहस्यों से परिचित कराती है। लेखक ने जहाँ एक ओर घने सुदूर जंगलों के रहवासी आदिवासियों की आडम्बरविहीन विशिष्ट जीवन शैली से परिचय कराया है वहीं अपनी एक रोमांचक कहानी में जंगली भूतों के रहस्य से भी परदा उठाया है। बाघ एकाकी जीवन बिताता है लेकिन बाघिन जब बच्चों के साथ है तब वह कितनी खूंखार हो जाती है इसका अहसास तो लेखक की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी से ही किया जा सकता है। यही नहीं यह कहानियाँ वनकर्मियों के जोखिम भरे जीवन में झाँकने का मौका भी बखूबी देती हैं। निश्चय ही यह पुस्तक न सिर्फ रोमांचक कहानियों के शौकीन व्यक्तियों को पसन्द आएगी बल्कि प्रकृति, पर्यावरण, वनों, वन्यजीवों के प्रति आकर्षण रखने वाले संवेदनशील लोगों के साथ ही साथ वन्यजीव प्रबन्धन से जुड़े लोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होगी।
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Description
JUNGLE KI KAHANIYAN by Sunayan Sharma
सुनयन शर्मा
वनों व वन्य जीवन के प्रति एक विशेष आकर्षण ही था कि सुनयन शर्मा (3 मार्च 1950) ने इंजीनियरिंग जैसे आकर्षक करिअर को छोड़कर वन सेवा को अपनाया व चार दशक तक वन विभाग के लिए अपनी सेवाएँ दीं और वन्यजीव प्रबन्धन इनका पसन्दीदा क्षेत्र रहा। प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक के रूप में इनके द्वारा किये गये नवाचारों की यूनेस्को द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी। सरिस्का के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व को पुनः आबाद करने का श्रेय भी आपको है। इस पुस्तक में सम्मिलित कहानी, ‘रण थम्भोर से लाये बाघों ने स्वीकार किया सरिस्का का नया आशियाना’ इसी घटना पर आधारित है। वर्ष 2010 में सरिस्का से सेवा निवृत्ति होने के बाद एक दशक से भी अधिक समय के लिए सरिस्का टाइगर फाउण्डेशन के अध्यक्ष रहे, और राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के मुद्दों को उठाया। वन, वन्यजीव और आदिवासियों के लिए लेखक के लगाव और उनसे लम्बे साहचर्य व सम्बन्ध को इनके रचनाकर्म में बखूबी देखा जा सकता है। देश-विदेश के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों के अनेकानेक भ्रमण-अनुभवों के आधार पर पुस्तकें, कहानियाँ, लेख लिखना इनकी अभिरुचि है। अभी तक सौ से अधिक इनके लेख/कहानियाँ देश-विदेश की प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकशित हो चुके हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व रोअर्स अगेन (अँग्रेजी) व इसका हिन्दी रूपान्तरण (सरिस्का बाघ संरक्षित क्षेत्र में फिर से गूंजी दहाड़), केवलादेव नेशनल पार्क भरतपुर : बर्ड्स इन पैराडाइज व वाइल्ड ट्रेजर्स एण्ड एडवेंचर्स: ए फॉरेस्टर्स डायरी आदि इनकी प्रकाशित पुस्तकें भारी लोकप्रिय रही हैं। वन, वन्यजीव व पर्यावरण के हितार्थ लेखक आज भी सतत प्रयत्नशील हैं।
Additional information
| Author | Sunayan Sharma |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| ISBN | 978-93-6201-813-7 |
| Pages | 182 |
| Publication date | 14-01-2025 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |



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