Description
1974 में भारत सरकार द्वारा “पद्मश्री” से सम्मानित प्रो. स्व. क़ाज़ी अब्दुल सत्तार द्वारा लिखित ‘शब-गज़ीदा’ (उर्दू उपन्यास 1966) का हिंदी अनुवाद “रात का डसा हुआ” का लिप्यंतरण क़ाज़ी शावेज़ सत्तार उर्फ़ मन्ना (पुत्र स्व.पद्मश्री प्रो. क़ाज़ी अब्दुल सत्तार) ने किया है।
‘‘क़ाज़ी सत्तार के उपन्यासों के दुनिया भर में हैं मुरीद ’’ ‘‘41 की उम्र ने पद्मश्री हासिल कर सत्तार बन गए थे उर्दू अदब के सशक्त हस्ताक्षर’’ – अमर उजाला
पुरस्कार: 1973 : प्रथम ग़ालिब पुरस्कार, 1974 : पद्मश्री ;भारत सरकार, 1977 : मीर अवॉर्ड, 1977 : उ.प्र. उर्दू अकादमी पुरस्कार, 1987 : अल्मी पुरस्कार, 1987 : राष्ट्रीय पुरस्कार उ.प्र. सरकार, 1996 : निशान-ए-सर सैयद पुरस्कार, 1998 : ज्ञानेंद्र पुरस्कार, 2002 : बहादुर शाह जफ़र पुरस्कार, 2005 : अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दोहा, क़तर, 2006 : राष्ट्रीय इक़बाल पुरस्कार, 2008 : आइएसटी विश्वविद्यालय उर्दू शिक्षक पुरस्कार, 2011 : उ.प्र. हिन्दी संस्थान का प्रथम पुरस्कार।






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