Kaath Ke Putley by Pragya
₹295.00 Original price was: ₹295.00.₹206.00Current price is: ₹206.00.
काठ के पुतले कहानीकार-उपन्यासकार प्रज्ञा का पाँचवाँ कहानी-संग्रह है। इसमें नौ लम्बी कहानियाँ शामिल हैं। ये कहानियाँ हमारे समय का आईना भी हैं और उससे आगे की ओर निकलती राह भी। इन कहानियों में आपको नए समय की धड़कनें सुनाई देंगी। प्रज्ञा की कहानियाँ अपनी विषयगत विविधता के कारण अलग पहचान बनाती हैं।
Out of stock
Description
इस संग्रह में भी तकनीक, बाजार, प्रेम, श्रम, पूँजी, शिक्षा आदि क्षेत्रों में यथार्थ के छूट गए जरूरी कोनों से प्रज्ञा उस सच को अपने पाठकों के लिए निकाल लाई हैं जिसे देखकर भी अनेक बार अनदेखा कर दिया जाता है। ‘काठ के पुतले’ शहर, कस्बों और गाँवों के जीवन में आए तेज बदलावों के बीच घायल मनुष्यता की कहानियाँ जरूर हैं पर यह घायल मनुष्यता पूरी जिजीविषा के साथ संघर्षरत रहकर अपना अनूठा आसमान रचती है। यह कहानी-संग्रह यथार्थ की ऐसी तस्वीर सामने लाता है जिसमें बाजार और बदली हुई अर्थव्यवस्था मनुष्य को उसके सहज मानवीय संवेदनाओं से दूर करके एक ही साँचे में ढले हुए, एक ही काठ के कटे हुए पुतलों में तब्दील कर देना चाहती है। ऐसे पुतले जो प्रतिरोध न करें, अपने अधिकारों की माँग न करें। जो मनुष्य होते हुए भी खामोश रहें। जो अन्याय होते हुए भी आँख मूँद लें पर व्यवस्था को धता बताकर जब भी कोई व्यक्ति उसके मंसूबों के प्रतिपक्ष में खड़ा हो जाता है तब लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं रह जाती। यह लड़ाई कहीं न कहीं पूरे मुनष्य जगत को बचाने की लड़ाई बन जाती है। जो विरोध का दामन थामकर कहती है—हम काठ के पुतले बनने से इंकार करते हैं। कथा कहने का प्रज्ञा का खास अन्दाज है। रहस्य और जिज्ञासा के ताने-बाने में किरदारों के जीवन के स्याह-धवल रंग और उनकी अपराजेय शक्ति ही इन कहानियों की आधारभूमि है। यथार्थ के सम-विषम स्वरों को सुनकर एक नया राग प्रज्ञा अपनी हर कहानी में साकार करने का प्रयत्न करती हैं। असम्भव में संभावना की तलाश उनकी कहानी-कला की खासियत है।
About the author
दिल्ली में जन्मी प्रज्ञा के ‘तक़सीम’, ‘मन्नत टेलर्स’, ‘रज्जो मिस्त्री’ तथा ‘मालूशाही…मेरा छलिया बुरांश’ शीर्षक से चार कथा-संग्रह हैं। ‘गूदड़ बस्ती’ और ‘धर्मपुर लॉज’ जैसे उनके दो बहुप्रशंसित उपन्यास हैं। तीसरा उपन्यास ‘काँधों पर घर’ आपके हाथों में है। उनके उपन्यास और कहानी संग्रह ‘मीरा स्मृति सम्मान’, ‘महेंद्रप्रताप स्वर्ण सम्मान’, ‘शिवना अन्तरराष्ट्रीय कथा सम्मान’, ‘प्रतिलिपि डॉट कॉम सम्मान’, ‘स्टोरी मिरर पुरस्कार’ से सम्मानित हुए हैं।
‘नुक्कड़ नाटक : रचना और प्रस्तुति’, ‘नाटक से संवाद’, ‘नाटक : पाठ और मंचन’, ‘कथा एक अंक की’ जैसी किताबें नाट्यालोचना केन्द्रित हैं। उनके द्वारा सम्पादित बारह नुक्कड़ नाटक ‘जनता के बीच : जनता की बात’ किताब में शामिल हैं। ‘तारा की अलवर यात्रा’ बाल साहित्य की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार 2008 से पुरस्कृत है। वैचारिक लेखन से जुड़े लेख प्रज्ञा की किताब ‘आईने के सामने’ में संकलित हैं। लगभग ढाई दशक से प्रज्ञा दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में अध्यापन कर रही हैं। इस समय वे हिन्दी विभाग, किरोड़ीमल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
Additional information
| Dimensions | 21 × 13 × 1 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-9348229939 |
| Pages | 168 |
| Language | Hindi |
| Publication date | 21 November 2024 |
| Publisher | Lokbharti Prakashan |
| Writer | Pragya |
Related products
-
The Day I Stopped Drinking Milk
₹299.00Original price was: ₹299.00.₹209.00Current price is: ₹209.00. -
-
-
HereThere and Everywhere by Sudha Murty
₹299.00Original price was: ₹299.00.₹224.00Current price is: ₹224.00.



Reviews
There are no reviews yet.