Kulta by Rajendra Yadav
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प्यार और मुक्ति इनसान की बुनियादी आकांक्षाएँ हैं। स्वाभाविक और दुर्निवार। लेकिन यही प्यार अगर उसे अपनी सहज गति को बाधित करने वाला बन्धन लगने लगे तो उसे तोड़कर आगे बढ़ने में भी वह एकपल की देरी नहीं करना चाहता। स्वेच्छा से चुनी गई एक राह को छोड़कर किसी और रास्ते पर बढ़ने का यह निर्णय निर्द्वन्द्व नहीं होता लेकिन प्यार की तलाश में इनसान नए रास्ते पर बढ़ने का जोखिम उठा ही लेता है।
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Description
प्यार और मुक्ति इनसान की बुनियादी आकांक्षाएँ हैं। स्वाभाविक और दुर्निवार। लेकिन यही प्यार अगर उसे अपनी सहज गति को बाधित करने वाला बन्धन लगने लगे तो उसे तोड़कर आगे बढ़ने में भी वह एकपल की देरी नहीं करना चाहता। स्वेच्छा से चुनी गई एक राह को छोड़कर किसी और रास्ते पर बढ़ने का यह निर्णय निर्द्वन्द्व नहीं होता लेकिन प्यार की तलाश में इनसान नए रास्ते पर बढ़ने का जोखिम उठा ही लेता है।
‘कुलटा’ प्यार के इसी प्रमेय को साबित करने वाली कहानी है। मिसेज तेजपाल अपने पति के अनुशासनबद्ध अभिजात परिवेश में खुद को बँधा महसूस करती है जबकि उसका व्यक्तित्व किसी निर्बन्ध झरने जैसा है। यौन सम्बन्धों के असन्तुलन और सैनिक जकड़बन्दी से मुक्ति के लिए वह अपने पवित्र प्यार की राह चुनती है। लेकिन एक स्त्री के अपने चुनाव को हमारा आधुनिक समाज कोई मान्यता नहीं देता। यदि वह अपनी राह स्वयं चुनती है तो उसके लिए कोई क्षमा नहीं है। इसे ही वह चुनौती देती है!… मिसेज तेजपाल पागल और कुलटा नहीं तो क्या है ?

राजेन्द्र यादव
जन्म : 28 अगस्त, 1929; आगरा।
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), 1951; आगरा विश्वविद्यालय।
प्रकाशित पुस्तकें : ‘देवताओं की मूर्तियाँ’, ‘खेल-खिलौने’, ‘जहाँ लक्ष्मी कैद है’, ‘अभिमन्यु की आत्महत्या’, ‘छोटे-छोटे ताजमहल’, ‘किनारे से किनारे तक’, ‘टूटना’, ‘ढोल और अपने पार’, ‘चौखटे तोड़ते त्रिकोण’, ‘वहाँ तक पहुँचने की दौड़’, ‘अनदेखे अनजाने पुल’, ‘हासिल और अन्य कहानियाँ’, ‘श्रेष्ठ कहानियाँ’, ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘सारा आकाश’, ‘उखड़े हुए लोग’, ‘शह और मात’, ‘एक इंच मुस्कान’ (मन्नू भंडारी के साथ), ‘मंत्र-विद्ध और कुलटा’ (उपन्यास); ‘आवाज तेरी है’ (कविता-संग्रह); ‘कहानी : स्वरूप और संवेदना’, ‘प्रेमचन्द की विरासत’, ‘अठारह उपन्यास’, ‘काँटे की बात’ (बारह खंड), ‘कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति’, ‘उपन्यास : स्वरूप और संवेदना’ (समीक्षा-निबन्ध-विमर्श); ‘वे देवता नहीं हैं’, ‘एक दुनिया : समानान्तर’, ‘कथा जगत की बागी मुस्लिम औरतें’, ‘वक़्त है एक ब्रेक का’, ‘औरत : उत्तरकथा’, ‘पितृसत्ता के नए रूप’, ‘पच्चीस बरस : पच्चीस कहानियाँ’, ‘मुबारक पहला क़दम’ (सम्पादन); ‘औरों के बहाने’ (व्यक्ति-चित्र); ‘मुड़-मुडक़े देखता हूँ’… (आत्मकथा); ‘राजेन्द्र यादव रचनावली’ (15 खंड)।
प्रेमचन्द द्वारा स्थापित कथा-मासिक ‘हंस’ के अगस्त, 1986 से 27 अक्टूबर, 2013 तक सम्पादन। चेख़व, तुर्गनेव, कामू आदि लेखकों की कई कालजयी कृतियों का अनुवाद।
निधन : 28 अक्टूबर, 2013
Additional information
| Dimensions | 20 × 13 × 1 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-8119989416 |
| Language | Hindi |
| Pages | 96 |
| Publication date | 6-11-2024 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Writer | Rajendra Yadav |


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