Description

जो दुनिया बहुत सारे कोलाहल से भरी है, लगभग हर पल एकान्त और स्मृति का अतिक्रमण करते सूचना- संजाल की मारी है, बहुत स्थूल और क्षणजीवी भावुकता की अभ्यस्त हो चली है, उसमें बाबुषा एक लगभग असम्भव लगता संवाद खोज लाती हैं- दो ऐसे लोगों के बीच, जो एक-दूसरे के लिए लम्बे समय तक अदृश्य रहे हैं, फ़ोन तक नहीं करते, ईमेल नहीं करते, आपस में मिलने का प्रयास भी नहीं करते – बस चिट्ठियाँ लिखते हैं।

Additional information

Author

Baabusha Kohli

Binding

Paperback

ISBN

978-81-943123-2-1

Language

Hindi

Publication date

01-12-2024

Publisher

Rukh publications

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