Description
रजनीश अमेरिका क्यों गए थे? वो स्त्री कौन थी जो छाया की तरह हमेशा उनके साथ रहती थी? उनके पूर्वजन्म की माँ और प्रेमिका उन्हें इस जन्म में कैसे मिलीं? उन्होंने ख़ुद को भगवान क्यों कहा और फिर यह उपाधि क्यों त्याग दी? अपनी दो सेक्रेटरियों लक्ष्मी और शीला के बीच वर्चस्व की लड़ाई का नुक़सान उन्होंने कैसे उठाया? वे इस्लाम पर कभी खुलकर क्यों नहीं बोले? उन्होंने किन 12 आध्यात्मिक नक्षत्रों की सूची बनाई थी? उन्होंने त्रिगुणों की साधना कैसे की? वे सेक्स के विरोधी थे या समर्थक? वे अमीरों के गुरु क्यों कहलाते थे? बंबई में उन्होंने 80 हज़ार लोगों पर सामूहिक शक्तिपात का प्रयोग कैसे किया था? क्या सच में ही गौतम बुद्ध की आत्मा ने उनकी देह में आश्रय लिया था?
अब ओशो कहलाने वाले रजनीश पर केंद्रित यह किताब उपरोक्त तमाम सवालों के जवाब खोजने के साथ ही उनसे जुड़े बीसियों अन्य संदर्भों की भी पड़ताल करती है और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का जायज़ा लेती है। लेखक ने स्वयं रजनीशप्रेमी होने के बावजूद वस्तुनिष्ठता के साथ उनसे जुड़े अनेक संदर्भों का अवलोकन किया है और उन पर एक ताज़ा, प्रासंगिक और ज़रूरी विवेचना प्रस्तुत की है, जो इस विवादास्पद किंतु विलक्षण गुरु के बारे में एक नई समझ बनाती है।
इस किताब को पढ़ने के बाद आप रजनीश को पहले की तरह नहीं देख सकेंगे।








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