MRITYUNJAY
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इसी श्रृंखला में अब यह उपन्यास ‘मृत्युंजयः। मूल उपन्यास मराठी में रचित। उपन्यासकार है शिवाजी सावन्त। विचित्र है कथा इस उपन्यास-रचना की। 14 वर्ष की अवस्था में एक किशोर ने सहपाठियों के साथ एक नाटक खेता जिसमें उसने कृष्ण की भूमिका निभायी। स्कूल के मंच पर नाटक होते ही रहते हैं। नाटककार और नाटक और अभिनेता सब अपने-अपने रास्ते लगे। लेकिन इस लड़के के मन में कर्ण आकर ऐसे विराजे कि आसन से उठने का नाम ही न लें। मन की उर्वरा भूमि में सूजन का एक बीज पड़ गया। धीरे-धीरे जमीन तैयार होती रही। जब 23-24 वर्ष की आयु में शिवाजी सावन्त ने कर्ण के चरित्रों को कागज पर उतारने का प्रयन किया तो एक नाटक की रेखाएँ उभरकर आने लगीं, किन्तु चित्र नहीं बन पाया। और तब शिवाजी सावन्त की अन्तः प्रेरणा ने कथा नायक को समुचित विधा की भूमिका दे दी। यह उपन्यास आकार लेने लगा। महाभारत का पारायण तो मूल आधार था ही, लेकिन दिनकर की कृति रश्मिरथी और केदारनाथ मिश्र ‘प्रभात का खण्डकाव्य ‘कर्ण’ ने बीज को ऐसे सींच दिया कि अंकुर फूट आये। अंकुर फूटने से लेकर वृक्ष के पत्तवित, पुष्पित और फलित होने तक की कथा सदा ही धरा की व्यथा-कथा भी रही है और पुलक. गाथा भी।
Description
मराठी के यशस्वी उपन्ययासकार शिवाजी सावंत का सांस्कृतिक उपन्यास मृत्युंजय आधुनिक भारतीय कथा-साहित्य में निःसन्देह एक विरल चमत्कार है। मूर्तिदवी पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित और अनेक भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनूदित यह कालजयी उपन्यास अपने लाखों पाठकों की सराहना पाकर इस समय भारतीय साहित्य-जगत् में लोकप्रियता के शिखर पर प्रतिष्ठित है।
मृत्युंजय उपन्यास महारथी दानवीर कर्ण के विराट् व्यक्तित्व पर केन्द्रित है। महाभारत के कई मुख्य पात्रों के बीच जहाँ स्वयं कृष्ण भी – कर्ण की ओजस्वी, उदार, दिव्य और सर्वांगीण छवि प्रस्तुत करते हुए श्रीसावंत ने जीवन के सार्थकता, उसकी नियति और मूल-चेतना तथा मानव-सम्बन्धों की स्थिति एवं संस्कारशीलता की मार्मिक और कलात्मक अभिव्यक्ति की है। मृत्युंजय में पौराणिक कथ्य और सनातन सांस्कृतिक चेतना के अन्तः सम्बन्धों को पूरी गरिमा के साथ उजागर किया गया है। उपन्यास को महाकाव्य का धरातल देकर चरित्र की इतनी सूक्ष्म पकड़, शैली का इतना सुन्दर निखार और भावनाओं की अभिव्यक्ति में इतना मार्मिक रसोद्रेक सब कुछ इस उपन्यास में अनूठा है। प्रस्तुत है मृत्युंजय का यह नवीनतम संस्करण।
Additional information
| Author | Shivaji Sawant |
|---|---|
| ISBN | 978-8126307692 |
| Language | Hindi |
| Publication date | 01-01-2002 |
| Publisher | Bhartiya Gyanpeeth |


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