Description

जैसे ही वे अपनी देहरी लाँघकर एक अजनबी दुनिया में कदम रखते हैं, घर की दूरस्थ, व्याकुल यादें, विदेशी धरती पर बेचेहरा हो जाने का अहसास और असुरक्षा-बोध के भयावह दौरे उन्हें आ घेरते हैं।

मार्केस के हास्यबोध, भावनात्मक ऊष्मा और विशिष्ट रंगों के साथ ये अनोखे मुसाफिर जान पाते हैं कि किसी लैटिन अमेरिकी का यूरोप में भटक जाना या किसी का भी अपने घर से दूर जीवन बिताना क्या होता है; और इन मुसाफिरों में शामिल हैं एक वृद्धा जो अपने कुत्ते को इस बात की ट्रेनिंग दे रही है कि उसके मरने के बाद वह उसकी कब्र पर रोया करे, एक पति जो अपनी घायल पत्नी के जीवन को लेकर बेहद परेशान और भयभीत है, और एक बूढ़ा जो अपने मन को पेरिस से एक लम्बी उड़ान पर भटकने को छोड़ देता है….

About the Author 

गाब्रिएल गार्सीया मार्केस

गाब्रिएल गार्सीया मार्केस (1927-2014) स्पैनिश भाषा के ऐसे रचनाकार थे जिनके लेखन ने समूची दुनिया के साहित्य को प्रभावित किया। उनके उपन्यास ‘एकाकीपन के सौ वर्ष’ को बीसवीं सदी की सबसे महत्त्वपूर्ण कृतियों में शुमार किया जाता है। 1982 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मार्केस की अन्य चर्चित कृतियाँ हैं– ‘आइज़ ऑफ़ ए ब्लू डॉग’ (1947), ‘लीफ़ स्टॉर्म’ (1955), ‘नो वन राइट्स टू द कर्नल’ (1958), ‘इन इविल ऑवर’ (1962), ‘बिग मामाज़ फ्यूनेरल’ (1962), ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड’ (1967), ‘दि ऑटम ऑफ़ द पेट्रियार्क’ (1975), ‘क्रॉनिकल ऑफ़ ए डेथ फोरटोल्ड’ (1981), ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलेरा’ (1985), ‘ऑफ़ लव एंड अदर डिमन्स’ (1994)।

Additional information

Dimensions 21 × 13 × 2 cm
Binding

Paperback

ISBN

9789360861834

Language

Hindi

Pages

176

Publisher

‎ Rajkamal Prakashan

Writer

Gabriel Garcia Marquez

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