Pragati Ke Path Par by Gurudutt
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समाज में राजनीतिक से लेकर आर्थिक तक के कई मुद्दों को पड़ताल करने वाला यह एक काल्पनिक उपन्यास है। लिंग, जाति, या वर्ग पूर्वाग्रह जैसी सामाजिक समस्याओं को पात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव के ज़रिए इसमें इस प्रकार रेखांकित किया गया है पाठक एक बार पढ़ना शुरू करे तो वह इसे पूरा पढ़कर ही दम लेगा।
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Description
प्रगति के पथ पर गुरुदत्त का एक लोकप्रिय सामाजिक उपन्यास है, जिसमें सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार करते हुए देश की एकता का संदेश दिया गया है। ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही सामाजिक बुराइयों को केंद्र में रखते हुए इस उपन्यास का ताना बाना इस प्रकार बुना गया है कि पाठकों को लगता है कि देश को तोड़ने की नहीं जोड़ने की जरूरत है, इसलिए अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन देकर जाति प्रथा का समूल विनाश कर देना चाहिए।
About the Author
गुरुदत्त को क्रांतिकारियों का गुरु भी कहा जाता है। जब ये लाहौर के नेशनल कॉलेज में हेडमास्टर थे, तब सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु इनके सबसे प्रिय शिष्य थे।
Additional information
| Dimensions | 19 × 12 × 1 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-0143474210 |
| Language | Hindi |
| Pages | 256 |
| Publication date | 22 April 2025 |
| Publisher | Penguin Swadesh |
| Writer | Gurudutt |



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