SHESH KATHA by Mamta Kalia
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शेषकथा — ममता कालिया
कथाकार, कथेतर गद्य की रचनाकार के रूप में शीर्ष पहचान अर्जित करने वाली ममता कालिया ने विगत वर्षों में पाठक वर्ग को स्मृत्यात्मक सर्जनात्मकता से अभिभूत किया है और चकित भी। चकित होने की अनेक वजहें हो सकती हैं-अप्रत्याशा, उत्कृष्टता, औचकपन आदि परन्तु इनके प्रभाव की कालावधि छोटी रहती है। पाठक या सामाजिक का अभिभूत होना भी उन्हीं तत्त्वों से घटित होता है, जिनसे वह चकित होता है। किन्तु इसके असर की कालावधि दीर्घजीवी होती है। कहना होगा, ममता कालिया के गद्य का अधिकांश अभिभूत करने की शक्ति से समृद्ध है। ममता कालिया के रचनाकार ने जिन विशेषताओं को हासिल किया है- सहजता, प्रवाहमयता, दृश्यात्मकता, नवाचार और स्त्री चेतना का व्यावहारिक पक्ष आदि उन्हें स्मृत्यात्मक सर्जनात्मकता में पिरोते हुए उन्होंने गद्य की अनेक अद्भुत और यादगार कृतियाँ रची हैं। ऐसी ही शानदार उपलब्धि है- ‘शेषकथा’। ‘शेषकथा’ उनकी स्मृत्यात्मक रचनायात्रा का नूतन पड़ाव है। ‘शेषकथा’ को कोई चाहे तो उपन्यास की तरह पढ़ सकता है, कोई चाहे तो संस्मरण या आत्मकथा की तरह। यहाँ इंसानों के संग स्थान, समय, जीवन इस तरह विन्यस्त हो सके हैं कि यह उपस्थित समयों का चाक्षुष डॉक्यूमेण्टेशन प्रतीत होने लगता है। सम्भवतः इन विशेषताओं के कारण भी ‘शेषकथा’ सर्जनात्मक गद्य की अनुपम किताब है। ‘शेषकथा’ के संसार में इलाहाबाद है, तो व्यासपिण्ड (जालन्धर जिला), मुम्बई भी है। इसमें रवीन्द्र कालिया हैं तो धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव आदि भी हैं। इन सबके समानान्तर और साथ साथ हैं, हिन्दी की समादृत और अनूठी रचनाकार ममता कालिया का बचपन, युवावस्था, रिश्ते-नाते, मायका, ननिहाल, ससुराल, विद्यार्थी जीवन, नौकरी की जद्दोजहद, प्यार, विवाह, दाम्पत्य, घर-परिवार, बच्चे, बेढब दिनचर्या। स्मृतियों की विशेषता होती है कि वे पुनसृजित होती हैं। ममता कालिया की ‘शेषकथा’ में पुनसृजन का यह जादू उसमें मौजूद शख्सियतों, स्थानों, दास्तानों को पुनर्नवा कर देता है। संक्षेप में कहें, ‘शेषकथा’ न केवल ममता कालिया के लेखन का महत्त्वपूर्ण सोपान है बल्कि वह हिन्दी साहित्य का भी विशिष्ट अर्जन है।
– अखिलेश
वरिष्ठ साहित्यकार एवं ‘तद्भव’ पत्रिका के सम्पादक
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Description
About The Author
ममता कालिया
2 नवम्बर 1940 को वृन्दावन में जन्मीं ममता कालिया हिन्दी साहित्य की अग्रपंक्ति में स्थान रखती हैं।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. इंग्लिश किया तथा वहीं प्राध्यापन भी। फिर मुम्बई और इलाहाबाद में प्राध्यापन। 2001 में सेवानिवृत्त ।
इन तथ्यों से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सन् 1963 से लगाकर अब तक वे लगातार लिखती रही हैं। उनकी कुल साहित्यिक पुस्तकों की संख्या 36 है, जिसमें 10 उपन्यास, 16 कहानी संग्रह, 5 कविता-संग्रह, 5 संस्मरण, 3 निबन्ध संग्रह के अतिरिक्त कुछ अनुवाद भी प्रकाशित ।
ममता कालिया ने साहित्य अकादेमी के लिए महिला लेखन के सौ वर्षों के इतिहास का सम्पादन किया है तथा पाँच वर्ष महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा की इंग्लिश पत्रिका HINDI की सम्पादक रही हैं।
साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2025, के. के. बिड़ला फाउण्डेशन का व्यास सम्मान, श्याम गोयनका ट्रस्ट का रतनादेवी अवार्ड, कमलेश्वर स्मृति सम्मान, वनमाली सम्मान, राममनोहर लोहिया सम्मान, प्रथम सावित्री बाई फुले सम्मान आदि अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए।

Additional information
| Publication date | 10-01-2026 |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-93-6201-039-1 |
| Pages | 192 |
| Language | Hindi |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |
| Writer | Mamta Kaliya |
20 reviews for SHESH KATHA by Mamta Kalia
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Nikita Tiwari –
शेषकथा’ में बीता हुआ समय जैसे दोबारा जीवित हो उठता है। शहर, लोग, रिश्ते और जीवन की छोटी-बड़ी घटनाएँ बहुत खूबसूरती से सामने आती हैं। किताब की हालत बेहतरीन थी।
Anunjay –
‘शेषकथा’ बेहद खूबसूरत और संवेदनशील संस्मरण है। ममता कालिया जी की लेखनी में एक अलग ही आत्मीयता महसूस होती है। My Setu Shop से किताब अच्छी स्थिति में और समय पर मिली।
Munindar –
किताब में स्त्री जीवन, रिश्तों, परिवार और संघर्षों की बहुत वास्तविक तस्वीर देखने को मिलती है। भाषा सरल है और कहानी दिल से जुड़ जाती है।
Gulshan Kumar –
शेषकथा’ की सबसे अच्छी बात इसकी जीवंतता है। यह कहीं भी बोझिल नहीं लगती और पाठक को लगातार अपने साथ लेकर चलती है। My Setu Shop का service experience भी excellent रहा।
Damodar Dash –
शेषकथा’ पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे मैं लेखिका के साथ उनके बचपन, रिश्तों और साहित्यिक जीवन की यात्रा कर रहा हूँ। बहुत सुंदर पुस्तक और अच्छी पैकेजिंग के लिए My Setu Shop को धन्यवाद।
Mohit Kushbaha –
ममता कालिया जी की लेखनी की सहजता इस किताब की सबसे बड़ी खूबी है। यह किताब पढ़ने के बाद कई प्रसंग लंबे समय तक मन में बने रहते हैं। My Setu Shop को धन्यवाद।
anurag kulkarani –
एक ऐसी किताब जिसे धीरे-धीरे पढ़ने और महसूस करने का आनंद अलग है। ममता कालिया जी ने स्मृतियों को बेहद रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया है। पुस्तक प्रेमियों के लिए शानदार विकल्प।
Rupali –
शेषकथा’ में निजी जीवन के साथ साहित्यिक संसार की भी बहुत रोचक झलक मिलती है। पुस्तक की प्रिंट क्वालिटी अच्छी है और My Setu Shop की डिलीवरी भी तेज रही।
Manjesh Upadhyay –
ममता कालिया जी का यह संस्मरण उनके जीवन के साथ-साथ एक दौर की सामाजिक और साहित्यिक तस्वीर भी प्रस्तुत करता है। बहुत meaningful और memorable read।
Puja Tripathi –
एक बहुत ही आत्मीय और ईमानदार किताब। बचपन से लेकर नौकरी, विवाह और साहित्यिक जीवन तक की स्मृतियाँ बहुत सुंदर ढंग से सामने आती हैं। शानदार खरीदारी अनुभव।
Nagesh Chaturvedi –
शेषकथा’ सिर्फ ममता कालिया जी की जीवन-कथा नहीं लगती, बल्कि हिंदी साहित्य और एक पूरे सामाजिक दौर का जीवंत दस्तावेज़ महसूस होती है। बेहद प्रभावशाली पुस्तक और My Setu Shop से अच्छी खरीदारी।
mayank Jalad –
बहुत सुंदर पुस्तक। इसमें व्यक्तिगत जीवन की सच्चाई, साहित्यिक संसार और बदलते समय की झलक एक साथ मिलती है। My Setu Shop से मिली किताब अच्छी पैकिंग में थी और समय पर पहुँची।
Anurudh –
हिंदी साहित्य और साहित्यिक इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह एक बेहतरीन पुस्तक है। पढ़ते हुए ममता कालिया जी के जीवन को बहुत करीब से महसूस किया।
Mayank Agrwal –
बहुत गहरी लेकिन बेहद सहज पुस्तक। लेखिका ने अपने अनुभवों को बिना किसी बनावट के प्रस्तुत किया है। My Setu Shop से ऑर्डर करना आसान रहा और डिलीवरी भी समय पर मिली।
Prem Chand –
रिश्तों, संघर्षों और पुरानी यादों को इतनी खूबसूरती से लिखना आसान नहीं है। ‘शेषकथा’ लंबे समय तक याद रहने वाली पुस्तक है। किताब समय पर डिलीवर हुई।
Moni Chaturvedi –
अगर आपको संस्मरण और हिंदी साहित्य पसंद है, तो ‘शेषकथा’ आपकी reading list में जरूर होनी चाहिए। My Setu Shop से मिली किताब अच्छी तरह पैक की हुई थी।
Girdhari Lal –
यह सिर्फ संस्मरण नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के एक पूरे दौर की झलक है। ममता कालिया जी की भाषा बहुत सहज और प्रभावी है। My Setu Shop से खरीदारी का अनुभव शानदार रहा।
Meena Kapoor –
‘शेषकथा’ मेरे लिए एक बहुत खास reading experience रहा। पुरानी स्मृतियों और साहित्यिक व्यक्तित्वों से मुलाकात जैसा अनुभव होता है। My Setu Shop से खरीदारी भी संतोषजनक रही।
Prakash Jha –
ममता कालिया जी ने अपने जीवन और स्मृतियों को जिस सहजता से प्रस्तुत किया है, वह दिल को छू जाता है। साहित्य प्रेमियों के लिए शानदार पुस्तक। My Setu Shop की सेवा भी बहुत अच्छी रही।
Mohini Karani –
ममता कालिया जी का लेखन बहुत जीवंत है। पढ़ते-पढ़ते कई दृश्य आँखों के सामने बन जाते हैं। हिंदी साहित्य पढ़ने वालों को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए। My Setu Shop भरोसेमंद लगा