Tum Ho Ki Muqaddama Likha Deti Ho | तुम हो कि मुकद्दमा लिखा देती हो
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एक ऐसे समय में जब यह मान लिया गया हो कि कविता या सरल-मति में साहित्य ही, हमारे समय के संघर्षों में हमारा बहुत साथ देने लायक नहीं रहा है—हालाँकि उससे कमतर-बदतर चीजों और लोगों से हम आस लगाये बैठे हैं—‘बूथ पर लड़ना’ सरीखी कविताएं बोध, विचार, विवेक और अनिर्णय की हमारी दुविधाजनक स्थिति को बदलती है। वह अपने भीतर जिस अन्यथा विवादास्पद तथ्य को अपना आत्म-सत्य स्वीकार कर आगे बढ़ती है, और उसके जितने आयामों को उद्घाटित करने में सफल हुई है, उसकी अपेक्षा हम हर अच्छी कविता से करते हैं—जो असल में बहुत कम मौक़ों पर पूरी होती दिखती है। इस लिहाज़ से वह इधर लिखी जा रही कविताओं में अपने तरह की अकेली है। हालाँकि बूथ जैसी सबसे छोटी इकाई पर भी प्रतिबद्ध होकर लड़नेवाले इस कवि में इस बात का भी बहुत तीखा एहसास है कि ‘बहुत सारे संघर्ष स्थानीय रह जाते हैं’
Description
Vyomesh Shukla समकालीन हिंदी साहित्य के चर्चित कवि, लेखक और आलोचक हैं। उनकी लेखनी अपने अनोखे शिल्प, तीखे सामाजिक बोध और गहरी संवेदनशीलता के लिए जानी जाती है।
व्योमेश शुक्ल ने कविता, कहानी, निबंध और आलोचना के माध्यम से हिंदी साहित्य में एक अलग पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में समाज, राजनीति, संस्कृति और मनुष्य के भीतर चल रहे द्वंद्व को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
“तुम हो कि मुकद्दमा लिखा देती हो” उनकी चर्चित कृतियों में शामिल है, जिसमें रिश्तों, भावनाओं और सामाजिक यथार्थ को एक विशिष्ट साहित्यिक शैली में अभिव्यक्त किया गया है। उनकी भाषा आधुनिक होने के साथ-साथ गहरी वैचारिक परतें भी रखती है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करती हैं।
व्योमेश शुक्ल की रचनाएँ विशेष रूप से युवा पाठकों, साहित्य प्रेमियों और गंभीर पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
Additional information
| ISBN | 978-8195254941 |
|---|---|
| Language | Hindi |
| Pages | 185 |
| Publication date | 1 January 2023 |
| Binding | Paperback |
| Writer | Vyomesh Shukla |
| Publisher | Rukh publications |


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