Description

ज़िंदगी सामाजिक मनोभूमि पर लिखा गया एक पारिवारिक उपन्यास है। इसके केंद्रीय पात्र हैं―गोपीशाह। वे एक बड़े परिवार के मुखिया हैं। परिवार के अधिकांश सदस्य भौतिक दृष्टिवादी हैं। परिणामतः उनका जीवन या तो अति सुख में बीतता है या अति दुःख में। गोपीशाह का कहना है कि वास्तविक जीवन सुख-दुःख से ऊपर की वस्तु है और ऐसा जीवन तभी जिया जा सकता है, जब वह योजनाबद्ध हो। साथ ही उसमें दुःखी के दुःख निवारण की भावना स्वार्थरहित हो। ज़िंदगी का यही निचोड़ प्रस्तुत उपन्यास का कथ्य है।
उपन्यास में चरित्र और घटनाओं का ऐसा अपूर्व समन्वय हुआ है कि दोनों ही प्रधान हो उठे हैं और दोनों की प्रधानता में ही एक अनूठे-जीवन रस का संचार हो रहा है। हमारा विश्वास है, ज़िंदगी का यह जीवन-रस वर्तमान तथा भावी पीढ़ी के लिए प्रेरक सिद्ध होगा।

About the Author

गुरुदत्त स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी के साथ-साथ हिंदी के महान उपन्यासकार थे। विज्ञान के विद्यार्थी और पेशे से वैद्य होने के बावजूद वे बीसवीं शती के एक ऐसे सिद्धहस्त लेखक थे, जिन्होंने लगभग दो सौ उपन्यास, संस्मरण, जीवनचरित आदि का सृजन किया और भारतीय इतिहास, धर्म, दर्शन, संस्कृति, विज्ञान, राजनीति और समाजशास्त्र के क्षेत्र में भी अनेक उल्लेखनीय शोध-कृतियाँ दीं। राष्ट्रसंघ के साहित्य-संस्कृति संगठन यूनेस्को के अनुसार गुरुदत्त 1960-1970 के दशकों में हिंदी साहित्य में सर्वाधिक पढ़े जानेवाले लेखक रहे हैं।
गुरुदत्त को क्रांतिकारियों का गुरु भी कहा जाता है। जब ये लाहौर के नेशनल कॉलेज में हेडमास्टर थे, तब सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु इनके सबसे प्रिय शिष्य थे।

Additional information

Dimensions 19 × 12 × 1 cm
Binding

Paperback

ISBN

978-0143477235

Pages

248

Language

Hindi

Publication date

15 July 2025

Publisher

‎ Penguin Swadesh

Writer

Gurudutt

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