Description
लेख-आलेख – नंदकिशोर नवल
Lekh-aalekh Part-1 (Aalochana Ke Prashan)
लेख-आलेख नंदकिशोर नवल के साहित्य संबंधी निबंधों का संकलन है। आलोचना के प्रश्न इसका पहला खंड है। नवल जी एक समय घोषित रूप से मार्क्सवादी आलोचक रहे हैं। इस पुस्तक में उनकी मार्क्सवादी आलोचना से संबंधित निबंध हैं।
“कबीर और जायसी की तुलना करते हुए डॉ. धर्मवीर ने कहा है कि जायसी का काव्य ‘पदमावत’ जहाँ दलितों के लिए एकदम अनुपयोगी है, क्योंकि वह अस्पृश्यता को मिटाने में तिल भर भी योगदान नहीं देता, वहाँ कबीर की एक-एक पंक्ति उनके लिए जीने की हिम्मत बँधाती है। दलित दृष्टुिकोण न तो साहित्य की कोई सार्वकालिक कसौटी है, न दलितों की आवश्यकता अस्पृश्यता- निवारण तक ही सीमित है। जहाँ तक कबीर की बात है, सच्चाई यह है कि चूँकि उन्होंने विश्व प्रपंच में रुचि ही नहीं ली है, इसलिए जिस अर्थ में उनकी एक-एक पंक्ति को दलितों को जीने की हिम्मत बँधाने वाली कहा गया है, वह सही नहीं है…”
-इसी पुस्तक से
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लेख-आलेख – नंदकिशोर नवल
| ISBN | 9.7894E+12 |
|---|---|
| Author | Nandkishore Naval |
| Binding | Paperback |
| Pages | 368 |
| Publication date | 28-09-2022 |
| Imprint | Setu Prakashan |











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