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नक्शाकशी – सरफराज आलम | हिंदी कविता संग्रह | Nakshakashi Book

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नक्शाकशी कवि सरफराज आलम का एक अनोखा और कल्पनाशील कविता संग्रह है, जो पाठकों को दुनिया के नक़्शों, यात्राओं और प्रेम के नए आयामों से परिचित कराता है। यह पुस्तक केवल भौगोलिक सीमाओं की बात नहीं करती, बल्कि उन भावनात्मक और मानवीय संबंधों की खोज भी करती है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं।

इस संग्रह की कविताएँ नक़्शे को एक रचनात्मक रूपक के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जहाँ प्रेम, स्मृतियाँ, संवाद और यात्राएँ एक साथ आकार लेते हैं। कवि यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या नक़्शों के माध्यम से प्रेम व्यक्त किया जा सकता है और क्या ऐसी दुनिया की कल्पना संभव है जहाँ सीमाएँ विभाजन नहीं बल्कि जुड़ाव का माध्यम बनें।

नक्शाकशी की कविताएँ पाठकों को एक ऐसी यात्रा पर ले जाती हैं जहाँ नक़्शे केवल स्थानों का विवरण नहीं देते, बल्कि रिश्तों, संवेदनाओं और मानवीय अनुभवों के नए अर्थ भी रचते हैं। यह संग्रह प्रेम, भाईचारे, संवाद और मानवीय एकता के संदेश को एक अद्भुत काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है।

हिंदी कविता के पाठकों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए यह पुस्तक एक विचारोत्तेजक, संवेदनशील और संग्रहणीय कृति है।

पुस्तक की विशेषताएँ

✔ प्रेम और यात्रा की अनूठी काव्यात्मक अवधारणा
✔ नक़्शों और मानवीय संबंधों का रचनात्मक संयोजन
✔ संवेदनशील, कल्पनाशील और विचारोत्तेजक कविताएँ
✔ आधुनिक हिंदी कविता के पाठकों के लिए विशेष संग्रह
✔ साहित्य प्रेमियों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी पुस्तक

Description

सरफ़राज़ आलम एक प्रतिष्ठित भूगोलविद्, शोधकर्ता, शिक्षक और कवि हैं, जिनका जन्म 5 जनवरी 1972 को बिहार के गोपालगंज जिले के सरया अख्तियार गाँव में हुआ। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से स्नातक शिक्षा प्राप्त की तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली से भूगोल में एम.ए., राजनीतिक भूगोल में एम.फिल. और पी-एच.डी. की उपाधियाँ अर्जित कीं।

राजनीतिक भूगोल, भौगोलिक शिक्षा और दक्षिण एशियाई अध्ययन के क्षेत्र में उनका योगदान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित रहा है। उनके 80 से अधिक शोधपत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तथा संपादित पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं। शोध और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए उन्हें वर्ष 2002 में जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फण्ड द्वारा प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू छात्रवृत्ति तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जूनियर एवं सीनियर रिसर्च फेलोशिप प्राप्त हुई।

उन्होंने मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं सामरिक विश्लेषण संस्थान, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में शोध एवं शिक्षण कार्य किया है। वर्तमान में वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के भूगोल विभाग में आचार्य (Professor) के पद पर कार्यरत हैं।

साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनात्मक पहचान उनके कविता संग्रह ‘नक्शानामा’ से स्थापित हुई है। उनकी कविताओं में भूगोल, मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, स्मृति, यात्रा और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। शोध की गहराई और काव्यात्मक कल्पना का यह अनूठा संगम उन्हें समकालीन हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।

Additional information

Author

नक्शानामा

Binding

Paperback

Language

Hindi

Pages

206

ISBN

978-93-6201-886-1

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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