अधिकतम से भी अधिक को पढ़कर आशा, अधिकता और संभावनाओं की कई राहें खुल जाती हैं। अपने जीवनभर के शोध से अर्जित किए ज्ञान को लेखक ने इस किताब में अपने पाठकों से साझा किया है। सफलता और खुशहाली के मार्ग की ओर जीने की सामान्य तकनीकों के द्वारा वे हमारा मार्गदर्शन करते हैं और हमारे जीवन में छोटी बड़ी चीज़ों की महत्ता का एहसास कराते हैं। निश्चितता और अनिश्चितता के बीच संशय में पड़े हर व्यक्ति को संतुलन बनाने और अपने अस्तित्व के विकास हेतु यह किताब ज़रूर पढ़नी चाहिए। यदि आप लगातार एक ही काम करते रहे, तो आप एक ही तरह का परिणाम पाते रहेंगे। यदि आप कुछ ऐसा पाना चाहते हैं, जो अब तक प्राप्त नहीं कर सके, ते आपको वह कार्य करने के लिए तत्पर होना चाहिए, जो आपने पहले कभी नहीं किया। अगर आप उसी राह पर चलेंगे, जिस पर सारा संसार चलता है, तो आप वहीं पहुँचेंगे, जहाँ बाकी सभी लोग पहुँच रहे हैं। यदि आप ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहाँ अभी तक कोर्इ नहीं पहुँचा, तो आपको वह सब करने के लिए तैयार रहना चाहिए, जो अभी तक किसी ने नहीं किया। किसी भी महत्त्वपूर्ण खोज के लिए प्रयास करना अनिवार्य है। पुरानी राहें छोड़ने वाले ही नर्इ राहें बना पाते हैं। प्रचुरता आपका जन्मसिद्ध अधिकार है। आप अधिकतम से अधिक पाने के अधिकारी हैं। और, इसके लिए एक मार्ग है।
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| Dimensions | 20 × 14 × 4 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-8183224307 |
| Language | Hindi |
| Pages | 244 |
| Publication date | 20 May 2014 |
| Publisher | Manjul Publishing House |
| Writer | Mahatria Ra |
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