Bhaap Ke Ghar Mein Sheeshe ki Ladki
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गद्य-कविता-संग्रह ‘बावन चिट्ठियाँ’ (2018) रजा पुस्तक माला के अंतर्गत राजकमल से प्रकाशित व वागीश्वरी पुरस्कार से सम्मानित । कथेतर गद्य की पुस्तक ‘भाप के घर में शीशे की लड़की’ (2021) रुख पब्लिकेशन्स से प्रकाशित। पटियाला के ऑटम आर्ट पब्लिकेशन द्वारा ‘भाप के घर में शीशे की लड़की’ का पंजाबी में अनुवाद व प्रकाशन। कविता-संग्रह ‘तट से नहीं… पानी से बँधती है नाव’ (2021), ‘उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है’ (2023) प्रकाशित ।
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Description
यह सच है कि बाबुषा कोहली की इन टिप्पणियों को कविता की तरह पढ़ने का मोह होता है।
यह भी सच है कि इनमें बहुत गहरी काव्यात्मकता है। लेकिन इस कविता में उलझे रहे तो उसके पार जाकर वह संसार नहीं देख पाएँगे जो इस गद्य का असली आविष्कार है।
Additional information
| Author | Baabusha Kohli |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-81-952549-0-3 |
| Language | Hindi |
| Pages | 190 |
| Publication date | 01-01-2021 |
| Publisher | Rukh publications |


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