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वसीम बरेलवी का सम्बन्ध मुरादाबाद के जागीरदारी घराने से है । इस घराने में बड़े-बड़े महान विद्यावान और साहित्यकार होते रहे हैं । उन्होंने 1958 में आगरा विश्वविद्यालय से उर्दू में एम.ए. किया । जल्दी ही उनकी नियुक्ति देहली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज में हो गयी । इसी दौरान उन्होंने मुशायरों में जाना शुरू कर दिया । कई ज़गह नियुक्ति के बाद जून 2000 में डीन के पद से कार्यमुक्त होकर वः पूर्ण रूप से शायरी को समर्पित हो गए । देश-विशेष में उन्हें असंख्य अवार्ड और सम्मान मिल चुके हैं । हिंदी उर्दू साहित्य अवॉर्ड , कैफ़ी आज़मी अदबी अवॉर्ड, फ़िराक इंटरनेशनल अवॉर्ड और अली सरदार जाफ़री अवॉर्ड यू.स.ए. शुरू होने के बाद सबसे पहले उन्हें ही प्रदान किए गए ।






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