Dason Dishaon Mein (Poems) By Naval Shukla
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दसों दिशाओं में – नवल शुक्ल
कवि नवल शुक्ल की कविता मैं एक अर्से से पढ़ता रहा हूँ। इधर जो नया लेखन हो रहा है- खासतौर से कविता के क्षेत्र में – उसके भीतर से कई नये नाम उभरकर सामने आए हैं। नवल शुक्ल का नाम उन्हीं में से एक है। जो बात उनकी कविता में पहली ही दृष्टि में पाठक को रोकती-टोकती है, वह है उनकी भाषा, जहाँ एक चुपचाप सृजनात्मक खेल निरन्तर चलता रहता है। यह खेल का सा भाव उन्हें अपनी पीढ़ी के दूसरे कवियों से अलग करता है। दरअसल, उसके पीछे उनकी यह चिन्ता कहीं छिपी हुई और कहीं साफ दिखाई पड़ती है कि अपने समय की भाषा के बने- बनाये ढरौं को तोड़ा कैसे जाए। यह कोशिश मुझे सार्थक लगती है और यही वह चीज है जो मेरे जैसे पाठक को उनकी कविता के उत्तरोत्तर विकास के प्रति एक खास तरह की आश्वस्ति प्रदान करती है।
एक और उल्लेखनीय बात मुझे यह दिखाई पड़ी कि इन कविताओं का रचयिता अकेलेपन के उस गरिमाबोध को सचेष्ट रूप से तोड़ने की कोशिश करता है, जिससे समकालीन कविता किसी हद तक आक्रान्त रही है। ‘अकेला नहीं हूँ ब्रह्माण्ड में, धरती के साथ हूँ गतिशील’ जैसी पंक्ति एक युवा मन के उस गहरे विश्वास को प्रकट करती है, जो सारी विषम परिस्थितियों से जूझते हुए भी अटूट बने रहने के दमखम से भरा है। पर दिलचस्प यह है कि एक सुखद सृजनात्मक सजगता के द्वारा कवि अपनी इस बुनियादी आस्था को कोरे आशावाद में विसर्जित होने से बचाता है और यह एक नये कवि के लिए अपने आप में एक सफलता है।
इस संग्रह की ज्यादातर कविताएँ उस भावभूमि से पैदा होती हैं जो शहर और गाँव की सीमा रेखा पर स्थित है। इसीलिए आप पाएँगे कि इन कविताओं का तानाबाना इस तरह बुना गया है कि उनमें एक दोहरी दुनिया की आवाजाही लगातार बनी हुई है। और बातों को छोड़ भी दें तो यह साफ तौर पर लक्ष्य किया जा सकता है कि इस आवाजाही का एक सुखद परिणाम है कविता में बहुत से ऐसे छूटे हुए शब्दों और नामों का आ जाना, जिन्हें समकालीन भाषा भूलती जा रही है। ये वे बातें हैं जिनसे एक नये कवि के सृजनात्मक रुझानों का पता चलता है और उन मूल स्रोतों का भी, जिनसे सृजन को पोषण प्राप्त होता है। इस संग्रह के रचयिता को उन मूल स्त्रोतों का पता है, जिनका एक यथासम्भव प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं वे कविताएँ, जो यहाँ संग्रहीत हैं।
– केदारनाथ सिंह
Description
Dason Dishaon Mein (Poems) By Naval Shukla
नवल शुक्ल
जन्म :27 जनवरी, 1958, तिवारी डीह, हरिना माड़, पलामू, झारखण्ड।
प्रकाशन : इस तरह एक अध्याय, मातृ भाषा में (कविता-संग्रह);
तिलोका वायकान (उपन्यास); नदी का पानी तुम्हारा है, बच्चा अभी दोस्त के साथ उड़ रहा है (बाल कविता- संग्रह); कविता में मध्य प्रदेश, राजा पेमल शाह (नाटक); मदारीपुर जंक्शन (नाट्य रूपान्तरण); मुरिया, दंडामी माड़िया, मध्य प्रदेश के धातु शिल्प और असदेवा गायकी (मोनोग्राफ्स)।
सम्मान पहले कविता संग्रह के लिए रामविलास शर्मा सम्मान। जर्मनी और इंग्लैण्ड की सांस्कृतिक यात्राएँ।
Additional information
| Author | Naval Shukla |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| ISBN | 978-93-6201-247-0 |
| Pages | 104 |
| Publication date | 20-01-2025 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |



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