Description
Isiliye Bachi Hui Hai Prithvi Ab Tak BY Anup Kumar
इसलिए बची हुई है पृथ्वी अब तक
इस संग्रह और इससे पूर्व की कविताएँ इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं कि अनूप कुमार सूक्ष्मतम पर्यवेक्षण और जीवनधर्मी विवेक के कवि हैं। उनकी कविताओं में अभिव्यक्त राजनीतिक चेतना यह संकेतित करती है कि वे जीवन और समाज में होने वाली गतिविधियों और घटनाओं को एकांगी दृष्टि से नहीं देखते। इसीलिए उनकी कविताएँ एकरैखिक न होकर बहुस्तरीय और संश्लिष्ट हैं। वे आपको विचलित करती हुई अवाक् कर देती हैं। आप एकाएक सन्नाटे में आ जाते हैं और सामने दीखती हुई चमक के पीछे की कालिमा आपकी पुतलियों के सामने….
Prem Ke Paksh Mein Prarthana-PB”
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Isiliye Bachi Hui Hai Prithvi Ab Tak BY Anup Kumar
| ISBN | 9.78812E+12 |
|---|---|
| Author | Anup Kumar |
| Binding | PaperBack |
| Pages | 128 |
| Publication date | 10-02-2024 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |
| Language | Hindi |











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