Description

यह सर्वमान्य तथ्य है कि सम्पूर्ण संस्कृत नाट्य वाङ्मय में महाकवि भास का योगदान अप्रतिम और अनन्य है। यह अकारण नहीं था कि लगभग आठ शताब्दियों के दीर्घकाल तक वे संस्कृत विद्वानों, आचार्यगणों और शोधार्थियों की दृष्टि से ओझल रहे। बीसवीं सदी के आरम्भ में ही उनका नाट्य साहित्य फिर से प्रकाश में आया और अल्प समय में ही वे शास्त्रीय नाट्य के पण्डितों, अनुसन्धानकर्ताओं तथा मनीषियों के मध्य गम्भीर चर्चा का विषय बन गये। यद्यपि उनके नाट्य साहित्य पर लेखादि तो बहुत प्रकाशित हुए, तथापि उनके समस्त रचनाकर्म का पर्याप्त विवेचन-विश्लेषण नहीं हो सका। कतिपय संस्कृत विद्वानों ने उनके नाट्य- साहित्य के लिए पाश्चात्य नाट्य सिद्धान्तों को निकष बनाया, जिससे वे युवा पीढ़ी के रंगकर्मियों के लिए दुरूह हो गये। उनके नाटकों का अनुवाद भी अधिकांशतः गद्यात्मक रहा, जिसके परिणामस्वरूप उनके नाटकों का प्रस्तुतीकरण भी यथार्थवादी शैली में हुआ। दूसरी ओर उनके नाट्यकर्म पर समीक्षात्मक ग्रन्थों का अत्यन्त अभाव रहा है। प्रस्तुत पुस्तक उसी अभाव की ओर इंगित करने का विनम्र प्रयास है। भास के सभी तेरह नाटकों पर दिये गये व्याख्यानों को लगभग उसी रूप में प्रस्तुत करने का औचित्य भी यही है। इस विमर्श में अनेक संस्कृत विद्वानों, शोधार्थियों तथा रंगकर्मियों के विचारों, जिज्ञासाओं और प्रश्नों को यथासम्भव उसी रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इसी व्याख्यान माला ने उनके समग्र नाटकों के हिन्दी पद्यात्मक पाठान्तरों के प्रकाशन की राह प्रशस्त की। अतः यह पुस्तक तथा भास नाट्य-समग्र एक दूसरे के पूरक ग्रन्थ हैं। सम्भवतः ये दोनों पुस्तकें भारतीय शास्त्रीय नाट्य के विद्वानों, शोधार्थियों तथा प्रयोक्ताओं को इस विषय पर विचारोत्तेजक सामग्री दे पायें, यह आशा है।

About the Author:

भारतरत्न भार्गव का जन्म 25 जनवरी 1938 को हुआ। राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में प्राध्यापक और आकाशवाणी दिल्ली तथा इन्दौर में नाटक विभाग के कार्यक्रम अधिकारी। भारतीय भाषाओं के उपन्यास / कहानियों के लगभग 50 रेडियो रूपान्तर । कविता और रंगकर्म में विशेष रुचि। प्रो. मोहन महर्षि के निर्देशन में अभिनय की शुरुआत फिर अनेक नाटकों में अभिनय तथा रूपान्तर किया। बी.बी.सी. लन्दन में हिन्दी विभाग के प्रोड्यूसर संगीत नाटक अकादेमी के उपसचिव (नाटक) के रूप में कार्य करते हुए देश के लगभग सभी शीर्षस्थ निर्देशकों, नाटककारों, समीक्षकों से गहरा परिचय। डॉ. कमलेश दत्त त्रिपाठी के सान्निध्य में भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र का गहन अध्ययन तथा विश्लेषण पद्मभूषण कावलम नारायण पणिक्कर के अनेक मलयाली नाटकों का हिन्दी अनुवाद। पणिक्कर जी के निर्देशन में भास के अनेक नाटकों का हिन्दी पाठान्तर विशेष रूप से प्रतिज्ञायौगन्धरायण तथा स्वप्नवासवदत्ता की स्वप्नकथा शीर्षक से पुनर्रचना दो काव्य संकलन, दृश्यों की धार तथा घिसी चप्पल की कील एवं दो नाट्यालोचना की पुस्तकें, रंग हबीब तथा भारतीय नाट्य परम्परा एवं आधुनिकता प्रकाशित। संगीत नाटक अकादेमी का अमृत पुरस्कार, हिन्दी अकादमी, नयी दिल्ली का विशिष्ट कृति पुरस्कार एवं राज. संगीत नाटक अकादमी के कला पुरोधा सम्मान से विभूषित। नाट्यकुलम संस्थान के कुलगुरु, जहाँ दृष्टिबाधितों को ब्रेल लिपि में शिक्षा एवं नाट्याभिनय का प्रशिक्षण दिया जाता है। दृष्टिबाधितों के साथ तीन नाटकों का निर्देशन एवं लेखन / रूपान्तर स्मृतिशेष शम्भु मित्र के रंग-व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर समीक्षात्मक पुस्तक के अतिरिक्त भास के नाटकों तथा भारतीय रंग-मनीषियों पर निबन्धों की पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य । सम्प्रति : भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय द्वारा प्रायोजित टैगोर नेशनल फेलोशिप के अन्तर्गत नाट्यशास्त्रीय परम्परा एवं प्रयोग विषय पर शोधकार्य में संलग्न ।

Additional information

ISBN

9.7882E+12

Author

Bharatratna Bhargva

Binding

Paperback

Pages

352

Publication date

25-02-2023

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “MAHAKAVI BHAS KA NATYA VAISHISHTYA By Bharatratna Bhargva”

Your email address will not be published. Required fields are marked *


You may also like…