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Man Ek Maili Kameez Hai – Bhawani Prasad Mishra

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Man Ek Maili Kameez Hai – Bhawani Prasad Mishra

“मन एक मैली कमीज है – भवानी प्रसाद मिश्र

“मन एक मैली कमीज है” कविता में कवि ने मन की स्थिति को अत्यंत सरल और प्रभावशाली प्रतीक के माध्यम से व्यक्त किया है। कवि मन की तुलना एक मैली कमीज से करते हैं। जिस प्रकार हम रोज़ कमीज पहनते हैं और वह दिनभर की धूल, पसीने और वातावरण के संपर्क में आकर मैली हो जाती है, उसी प्रकार मन भी जीवन की परिस्थितियों, इच्छाओं, चिंताओं और बुरे विचारों से प्रभावित होकर मलिन हो जाता है।

कविता का मुख्य भाव यह है कि मन स्वभावतः शुद्ध होता है, परंतु संसार के संपर्क में आकर वह धीरे-धीरे दूषित होने लगता है। मनुष्य दिनभर विभिन्न प्रकार के अनुभवों से गुजरता है—ईर्ष्या, क्रोध, लोभ, अहंकार और प्रतिस्पर्धा जैसी भावनाएँ उसके मन को प्रभावित करती हैं। परिणामस्वरूप मन की निर्मलता कम होती जाती है। कवि यह भी संकेत करते हैं कि जब मन अधिक मलिन हो जाता है, तो व्यक्ति स्वयं से ही असंतुष्ट और व्यथित महसूस करने लगता है।

कमीज को धोकर साफ किया जा सकता है; उसी प्रकार मन को भी अच्छे विचारों, सत्संग, आत्मचिंतन और नैतिक आचरण से शुद्ध किया जा सकता है। यहाँ कवि आत्मशुद्धि की आवश्यकता पर बल देते हैं। वे बताते हैं कि बाहरी स्वच्छता जितनी आवश्यक है, उससे कहीं अधिक आवश्यक है आंतरिक स्वच्छता। यदि मन शुद्ध होगा तो जीवन भी सुखमय और संतुलित रहेगा।

कविता की भाषा अत्यंत सरल, सहज और बोलचाल की है। यही इसकी विशेषता है। कवि ने किसी जटिल शब्दावली का प्रयोग नहीं किया, बल्कि सामान्य जीवन से जुड़े प्रतीक द्वारा गहन दार्शनिक विचार प्रस्तुत किया है। यह कविता हमें आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करती है और यह संदेश देती है कि हमें समय-समय पर अपने मन को भी “धोते” रहना चाहिए, ताकि जीवन की वास्तविक सुंदरता को अनुभव किया जा सके।

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Description

भवानी प्रसाद मिश्र आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 29 मार्च 1913 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद (अब नर्मदापुरम्) जिले के टिगरिया गाँव में हुआ था। वे ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी कविता के माध्यम से सरलता, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को सशक्त रूप से व्यक्त किया। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, प्रकृति, नैतिकता और सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

मिश्र जी की प्रारंभिक शिक्षा मध्य प्रदेश में ही हुई। बचपन से ही उन्हें हिंदी भाषा और साहित्य से गहरा लगाव था। महात्मा गांधी के विचारों का उनके जीवन और साहित्य पर गहरा प्रभाव पड़ा। वे स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े और राष्ट्रीय चेतना को अपनी कविताओं में स्थान दिया। गांधीवादी सादगी, अहिंसा और सत्य के सिद्धांत उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से झलकते हैं।

भवानी प्रसाद मिश्र की काव्य भाषा अत्यंत सरल, सहज और बोलचाल की है। वे कठिन शब्दों और अलंकारों की अपेक्षा स्वाभाविक अभिव्यक्ति में विश्वास रखते थे। उनकी कविताएँ आम जनमानस से सीधे जुड़ती हैं। उन्होंने मनुष्य के आंतरिक जीवन, प्रकृति के सौंदर्य, सामाजिक विसंगतियों और नैतिक मूल्यों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया।

उनकी प्रमुख कृतियों में ‘गीत फरोश’, ‘बुनी हुई रस्सी’, ‘त्रिकाल संध्या’ आदि उल्लेखनीय हैं। ‘बुनी हुई रस्सी’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान की महत्वपूर्ण पहचान है।

मिश्र जी का साहित्य जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। वे मानते थे कि कविता का उद्देश्य केवल सौंदर्य-बोध नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और मानवीय संवेदनाओं को जगाना भी है। उनकी रचनाएँ पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती हैं।

20 फरवरी 1985 को उनका निधन हुआ, किंतु उनका साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है। भवानी प्रसाद मिश्र हिंदी साहित्य के ऐसे कवि हैं जिन्होंने सरल भाषा में गहरी बात कहने की अद्भुत क्षमता दिखाई। उनका जीवन और कृतित्व हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाला अमूल्य योगदान है।

Additional information

ISBN

9.78819E+12

Author

Bhawani Prasad Mishra

Binding

Paperback

Pages

160

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Vagdevi

Language

Hindi

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