Sale!

Neem Roshni Main – Madan Kashyap

Original price was: ₹130.00.Current price is: ₹117.00.

10% OFF

Neem Roshni Main – Madan Kashyap
नीम रोशनी में- मदन कश्यप

मदन कश्यप की कविताओं का यह नया संग्रह ‘नीम रोशनी में’ की गयी एक सघन यात्रा की तरह है जो हमारे समाज के इतिहास, यथार्थ और नियति के सवालों से सामना करती चलती है। इस नीम रोशनी में’ हालाँकि सब कुछ दीखता है पर कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं दीखता और इसमें कविता भी नहीं लिखी जा सकती, फिर भी मदन कश्यप का ‘कालयात्री’ मोहनजोदेडो-हडप्पा और बेबीलोनी सभ्यताओं से गुजरता हुआ, उन्हें जगाता हुआ, एक रोमांचक मानवीय अतीत को लाँघता उस वर्तमान तक आता है जो भूमंडलीकरण और लुटेरी व्यवस्थाओं और भूखी आबादियों का वर्तमान है। ‘कालयात्री’ इस संग्रह की अंतिम कविता है और इस लंबी कविता में मदन अन्याय के बरक्स प्रेम का एक ऐतिहासिक विमर्श रचते हैं जिसमें अंततः प्रेम का विमर्श बचा रहता है। ‘कालयात्री’ एक महत्त्वपूर्ण कविता है जिसमें यह महादेश ‘एक लंबी सुरंग से गुजरती ट्रेन की तरह है’ और ‘हँसी के झरनों’ और ‘उजास की दुनिया’ के लिए कवि की यात्रा जारी है। यह संग्रह चार दिलचस्प हिस्सों में बँटा है। पहले फलक में सभ्यता, इतिहास, संस्कृति और लोकजीवन का राग-विराग और स्वप्न है। यह हिस्सा इस काव्यात्मक तरकीब का भी अच्छा उदाहरण है कि लोकजीवन और स्मृति से हम क्या कुछ ले सकते हैं। ‘आँझुलिया और ‘माँ का गीत’ जैसी कविताएँ ऐसी ही लोकनिश्छलता की अभिव्यक्ति हैं। दूसरे हिस्से में एक हताशा, एक उदासी से हमारी मुठभेड़ होती है जिसमें ‘भय’, ‘झूठ’, ‘गुनाह’, ‘लालच’, और ‘ऊब’ जैसी कविताओं के जरिये सच को बचाने की चिंता प्रकट हुई है। तीसरे अंश में हम हताशा के माहौल में जन्म लेती क्रूरता को देखते हैं। इन कविताओं में हमारी व्यवस्था की अमानवीयता और अन्याय से पीड़ित समाज का, एक दयनीय देश का, विजेता की हँसी का और कुल मिला कर एक भयावह समय’ का विमर्श है। यह ऐसा वक़्त है कि ‘फूलों को देख कर कहना मुश्किल हो कि फूल ही हैं।’ ख़ास बात यह है कि चौथे अंश तक आते-आते मदन कश्यप का ‘कालयात्री’ नीम रोशनी और तपती हुई सड़क के निर्मम सूनेपन में भी फिर’ सभ्यताओं की अंतर्यात्रा करता हुआ उस लोकजीवन में लौटना चाहता है जहाँ आषाढ़ की बारिश में उपजे मोथे की जड़ों सी मीठी यादें हैं।’ यह एक कवि का बुनियादी आशावाद है, जो शब्दों को बेचने से इनकार करता है और एक प्रेम विरोधी व्यवस्था में प्रेम को संभव करता है। मदन का यह संग्रह इस अर्थ में भी महत्त्वपूर्ण है कि वे सिर्फ लोकजीवन की मासूम लगती सतह पर ही नहीं रहते. उसमें पैठते हैं, उसकी नयी जड़ों तक जाते हैं और शायद यही वजह है कि कई कविताओं में जनता की बोली-बानी के कई नये शब्द, नयी अभिव्यक्तियाँ हिंदी काव्यभाषा को दे जाते हैं।


Kindle E-Book Also Available

Available on Amazon Kindle

In stock

Description

 

About the Author:

वरिष्ठ कवि और पत्रकार। अब तक छ: कविता-संग्रह–’लेकिन उदास है पृथ्वी’ (1992, 2019), ‘नीम रोशनी में’ (2000), ‘दूर तक चुप्पी’ (2014, 2020), ‘अपना ही देश’, कुरुज (2016) और ‘पनसोखा है इन्द्रधनुष’ (2019); आलेखों के तीन संकलन-‘मतभेद’ (2002), ‘लहलहान लोकतंत्र’ (2006) और ‘राष्ट्रवाद का संकट’ (2014) और सम्पादित पुस्तक ‘सेतु विचार : माओ त्सेतुङ’ प्रकाशित। चुनी हुई कविताओं का एक संग्रह ‘कवि ने कहा’ शृंखला में प्रकाशित। कविता के लिए प्राप्त पुरस्कारों में शमशेर सम्मान, केदार सम्मान, नागार्जुन पुरस्कार और बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान उल्लेखनीय। कुछ कविताओं का अंग्रेजी और कई अन्य भाषाओं में अनुवाद। हिन्दीतर भाषाओं में प्रकाशित समकालीन हिन्दी कविता के संकलनों और पत्रिकाओं के हिन्दी केन्द्रित अंकों में कविताएँ संकलित और प्रकाशित। दूरदर्शन, आकाशवाणी, साहित्य अकादेमी, नेशनल बुक ट्रस्ट, हिन्दी अकादमी आदि के आयोजनों में व्याख्यान और काव्यपाठ। देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित संगोष्ठियों में भागीदारी। विभिन्न शहरों में एकल काव्यपाठ।

Additional information

ISBN

9.78939E+12

Author

Madan Kashyap

Binding

Paperback

Pages

120

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Neem Roshni Main – Madan Kashyap”

Your email address will not be published. Required fields are marked *


You may also like…