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Qaul-E-Faisal – Maulana Abul Kalam Azad

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क़ौल -ए- फ़ैसल -मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान मौलाना आज़ाद के ऊपर 1920 में राजद्रोह का मुक़दमा चलाया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कोर्ट में तहरीरी बयान दिया था, जो उर्दू भाषा में क़ौल-ए-फ़ैसल नाम से प्रकाशित हुआ। आज के समय में देशद्रोह, राष्ट्रवाद जैसे बेहद ज्वलंत मुद्दों के सन्दर्भ में यह बेहद प्रासंगिक है। मौलाना आज़ाद की इस क़ौल-ए-फ़ैसल के माध्यम से न केवल राजद्रोह क़ानून को ऐतिहासिक नज़रिए से समझा जा सकता है बल्कि मौजूदा दौर की राजद्रोह क़ानूनी की जटिलताओं को भी समझने में पाठकों के लिए यह किताब एक महत्त्वपूर्ण साबित होगी।

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Description

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Qaul-E-Faisal – Maulana Abul Kalam Azad, Translation Mohammad Naushad

स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान मौलाना आज़ाद के ऊपर 1920 में राजद्रोह का मुक़दमा चलाया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कोर्ट में तहरीरी बयान दिया था, जो उर्दू भाषा में क़ौल-ए-फ़ैसल नाम से प्रकाशित हुआ। आज के समय में देशद्रोह, राष्ट्रवाद जैसे बेहद ज्वलंत मुद्दों के सन्दर्भ में यह बेहद प्रासंगिक है। मौलाना आज़ाद की इस क़ौल-ए-फ़ैसल के माध्यम से न केवल राजद्रोह क़ानून को ऐतिहासिक नज़रिए से समझा जा सकता है बल्कि मौजूदा दौर की राजद्रोह क़ानूनी की जटिलताओं को भी समझने में पाठकों के लिए यह किताब एक महत्त्वपूर्ण साबित होगी।

क़ौल -ए- फ़ैसल -मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान मौलाना आज़ाद के ऊपर 1920 में राजद्रोह का मुक़दमा चलाया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने कोर्ट में तहरीरी बयान दिया था, जो उर्दू भाषा में क़ौल-ए-फ़ैसल नाम से प्रकाशित हुआ। आज के समय में देशद्रोह, राष्ट्रवाद जैसे बेहद ज्वलंत मुद्दों के सन्दर्भ में यह बेहद प्रासंगिक है। मौलाना आज़ाद की इस क़ौल-ए-फ़ैसल के माध्यम से न केवल राजद्रोह क़ानून को ऐतिहासिक नज़रिए से समझा जा सकता है बल्कि मौजूदा दौर की राजद्रोह क़ानूनी की जटिलताओं को भी समझने में पाठकों के लिए यह किताब एक महत्त्वपूर्ण साबित होगी।

Additional information

ISBN

9.78939E+12

Author

Maulana Abul Kalam Azad

Binding

Hardcover

Pages

200

Publication date

12-09-2022

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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