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Safar mein dhoop to hogi By Nida Fazli

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Safar mein dhoop to hogi By Nida Fazli


उन के जैसी प्यारी और फ़ौरन एक लतीफ़ घण्टियों के से बज उठने का रद्दे-अमल (प्रतिक्रिया) पैदा करने वाली शाइरी किसी की नहीं है।

– शम्स उर रहमान फारुकी


मेरे खयाल में जदीद शाइरी कल जिन नामों से जानी जायेगी उन में एक नाम निदा फाजली होगा। निदा ने अपना रिश्ता खड़ी बोली की रिवायत से जोड़ा है। उन्होंने अरबी-फ़ारसी के मुश्किल अल्फाज से दामन बचाया है। बेतकल्लुफ जबान में पते की बात कहने का हुनर उन्होंने भक्ति-अहद के कवियों से हासिल किया है। निदा रहते तो शहर में हैं लेकिन बसे हुए हैं गांव में, इसलिये अगर उन्हें गुम होते हुए घरों का शाइर कहें तो गलत नहीं होगा।

– शीन काफ निजाम


यह संयोग की बात नहीं है कि उर्दू के कुछ जदीद शायरों ने तो हिंदी और उर्दू की दीवार ही ढहाकर रख दी और ऐसे जदीदियों में निदा फ़ाजली का नाम सब से पहले लिया जायेगा।

 शानी


sagar-seemant-Sanjeev,

Sagar Seemant सागर सीमान्त By Sanjeev

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Description

सफ़र में धूप तो होगी ~ निदा फ़ाज़ली

About the Author:

(12 अक्टूबर 1938-8 फरवरी 2016) जन्म दिल्ली में। बचपन ग्वालियर में गज़रा। बम्बई में रहकर उर्दू की साहित्यिक पत्रिकाओं के लिये भी लिखा। टी.वी. और फ़िल्मों के लिये लिखा। कविता संग्रह : लफ़्ज़ों का पुल, मोर नाच, आंख और ख़्वाब के दर्मियाँ, खोया हआ सा कुछ, शहर मेरे साथ चल, ज़िन्दगी की तरफ़, शहर में गाव, सब का है माहताब। गद्य : मुलाक़ातें (साहित्यिक मुलाक़ातें/साक्षात्कार), दीवारों के बीच, दीवारों के बाहर, तमाशा मेरे आगे, चेहरे। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित निदा फ़ाज़ली 1998 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से अलंकृत हुए।

Additional information

ISBN

818748201X

Author

Nida Fazli

Pages

160

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Vagdevi

Language

Hindi

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