Description
Samajik Nyay Aur Chetna Ki Bhartiye Kavitayen
Samajik Nyay Aur Chetna Ki Bhartiye Kavitayen – Editor Mohan Verma
सामाजिक न्याय और चेतना की भारतीय कविताएँ – मोहन वर्मा
सामाजिक न्याय की मानव जीवन के सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक परिसर में प्रमुखता से उपस्थिति आधुनिक युग के महान वैचारिक बोधों में एक है। फ्रांसीसी क्रान्ति से जन्मे विचारों (स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व) ने जिन स्वप्नों को जन्म दिया, सामाजिक न्याय उसकी अन्यतम परिणति होती। किन्तु तमाम सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संघर्षों और स्वप्नों के बावजूद अन्याय, शोषण, गैरबराबरी आज भी समाज में बदस्तूर कायम हैं। यह कोई सुखद स्थिति तो नहीं ही कही जा सकती।
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Samajik Nyay Aur Chetna Ki Bhartiye Kavitayen
| ISBN | 9.78939E+12 |
|---|---|
| Editor | Mohan Verma |
| Binding | Paperback |
| Pages | 448 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |
| Imprint | Setu Prakashan |
| Language | Hindi |











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