Shubh Din by Balram
₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹212.00Current price is: ₹212.00.
समकालीन हिन्दी कहानी में ‘शुभ दिन’ उस दिन की सरस प्रतीक्षा के रूप में पढ़ी जानी चाहिए, जब पुरुष स्त्रीचेता होगा, स्त्री की संकेत भाषा समझ पाने लायक। बलराम की तरह ही ‘शुभ दिन’ का नायक एक स्त्रीचेता नवल पुरुष है, जो स्त्री को बहस की सुविधा देता है और थककर सोई उसकी देह पर अपनी देह आरोपित नहीं करता
In stock
Description
केदारनाथ अग्रवाल और रामविलास शर्मा की तरह बलराम भी पत्नीमुखी प्रेम के चितेरे हैं। विपन्न से विपन्न घर में भी यदि पति या पिता संवेदनशील हो तो गृहस्थी सुखी हो सकती है। दाम्पत्य है तो एक बड़ा भाव ही, जिसमें नौ रसों का समाहार है—शृंगार से शुरू होकर यात्रा रौद्र, वीभत्स आदि के भभके संभालती हुई अंततः करुणा पर तिरोहित! ‘शुभ दिन’ पति-पत्नी की मैरिज एनिवर्सरी का दिन है! कभी बच्चा, कभी मूड, कभी थकान, किसी न किसी बहाने टलती रही दैहिक आपसदारी इस दाम्पत्य में क्षीण हो चली है, पर पति स्वयं को उस शुभ दिन भी आरोपित नहीं करता और पत्नी आँखें मूंदे इंतजार करती रहती है, पर जो टल गया है, उसका रस-बोध बहुत सघन है, जीवन में और कहानी में भी। इस मार्मिकता में यह कहानी ओ हेनरी की ‘द गिफ्ट्स ऑफ द मेजाई’ से तुलनीय लगती है। समकालीन हिन्दी कहानी में ‘शुभ दिन’ उस दिन की सरस प्रतीक्षा के रूप में पढ़ी जानी चाहिए, जब पुरुष स्त्रीचेता होगा, स्त्री की संकेत भाषा समझ पाने लायक। बलराम की तरह ही ‘शुभ दिन’ का नायक एक स्त्रीचेता नवल पुरुष है, जो स्त्री को बहस की सुविधा देता है और थककर सोई उसकी देह पर अपनी देह आरोपित नहीं करता! ऐसे ही संवेदनशील और हमदर्द पुरुष की प्रतीक्षा में आज की हर स्त्री है, जो अपनी वृत्तियों पर काबू रख सके और योग्य बनकर इंतजार कर सके कि स्त्री स्वयं उमड़कर उसका हाथ पकड़ लेगी! अपनी कहानियों में बलराम ऐसे संवेदनशील पुरुषों की कल्पना कर पाए, यह एक बड़ी बात है! इस संग्रह की सभी कहानियाँ ऐसी ही मोहक हैं। —अनामिका
About The Author
बलराम का जन्म 15 नवम्बर, 1951 को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘कलम हुए हाथ’, ‘मसीहा की आँखें’ (कथा-संग्रह); ‘नेताजी की वापसी’ (व्यंग्य); ‘जननी जन्मभूमि’, ‘मंजरी का मन’ (उपन्यास); ‘माफ करना यार’ (संस्मरण); ‘मेरा कथा समय’, ‘लोक और इतिहास’, ‘स्वाधीनता का महास्वप्न’ (आलोचना); ‘औरत की पीठ पर’ (रिपोर्ताज); ‘बातों के बादशाह’ (साक्षात्कार); ‘प्रेमचन्द रचनावली’, ‘विश्व कथा कोश’ (सम्पादन)। उनके जीवन और सृजन पर कन्द्रित पुस्तकें हैं—‘कथेतर गद्य शिल्पी बलराम’, ‘कथा कहे बलराम’ तथा ‘बलराम : एक शिनाख्त’।
वे एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम समिति में रहे। साहित्य अकादेमी की ओर से फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) में भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व किया। दैनिक ‘आज’ (कानपुर) से ‘सारिका’ में आए, फिर ‘नवभारत टाइम्स’ में साहित्य सम्पादक रहे। ‘लोकायत’, ‘शब्दयोग’ और ‘शिखर’ का भी सम्पादन किया।
उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ के ‘साहित्य भूषण सम्मान’, बिहार राजभाषा विभाग, पटना के ‘भीमराव अम्बेडकर सम्मान’, हिन्दी अकादमी, दिल्ली के ‘साहित्यकार सम्मान’, हिन्दी साहित्य समिति, इन्दौर के ‘शताब्दी सम्मान’, ‘अट्टहास शिखर सम्मान’, ‘माधवराव सप्रे सम्मान’, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के ‘गणेशशंकर विद्यार्थी सम्मान’ और वाराणसी के ‘सृजन शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।
सम्प्रति : साहित्य अकादेमी की पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के सम्पादक।
Additional information
| Dimensions | 21 × 13 × 1 cm |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-9360865733 |
| Language | Hindi |
| Publication date | 30 June 2025 |
| Pages | 160 |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Writer | Balram |
Related products
-
Chicken Soup For the Soul by Jack Canfield (Author), Mark Victor Hansen (Author), Amy Newmark (Author)
₹599.00Original price was: ₹599.00.₹449.00Current price is: ₹449.00.



Reviews
There are no reviews yet.