Ankaha Aakhyan By Jaya Jadwani (Hardcover)
₹340.00 Original price was: ₹340.00.₹255.00Current price is: ₹255.00.
संग्रह की कहानियाँ मध्य वर्ग में स्त्री जीवन की नियति और त्रासदी को अपना विषय बनाती हैं। खासतौर से वैवाहिक जीवन के भीतर स्त्री जीवन को। वैसे तो पूरे समाज और सभ्यता में वैवाहिक जीवन में स्त्रियों का जीवन ज्यादा संघर्षपूर्ण, त्रासद और विडंबनात्मक होता है। परंतु मध्यवर्गीय स्त्रियाँ इस त्रासदी को ज्यादा भोगती हैं, क्योंकि संघर्ष विडंबना और त्रासदी को पति, परिवार और समाज के स्तर पर वे कभी अभिव्यक्त नहीं कर पातीं। उन्हें इस त्रासदी को झेलते हुए अच्छी बेटी, अच्छी पत्नी, अच्छी बहू बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। लंबे वैवाहिक जीवन में यह प्रशिक्षण उनके जीवन के संघर्ष को कई गुणा बढ़ाता है। जिन स्त्रियों में स्व व्यक्तित्व के प्रति सजगता उत्पन्न हो जाती है, उनका संघर्ष कई गुणा बढ़ जाता है। ये कहानियाँ इन्हीं स्व व्यक्तित्व सजग स्त्रियों की कहानियाँ हैं। इस जागृति की कोई उम्र नहीं होती। ‘अनकहा आख्यान’ की ईवा कहती है—’चालीस के बाद मेरी नींद खुली।’ इन कहानियों का दूसरा सिरा है-इन मध्यवर्गीय स्त्रियों की त्रासदी, घुटन की अभिव्यक्ति। पर ये कहानी का पार्श्व हैं। मुक्ति की आकांक्षा इन कहानियों का मुख्य उद्देश्य है। इन मध्यवर्गीय स्त्रियों में ऊब, घुटन, व्यक्तित्व हनन और उसके बाद भी कुशल गृहिणी बनने का तनाव कितना गहरा है कि लंबे वैवाहिक जीवन का अंत मुक्ति का संदर्भ निर्मित करता है। अब उठूगी राख़ से’ में पति के शव के समक्ष होने पर भी वह दुख का अनुभव करने के स्थान पर शांति महसूस करती है-‘बेइंतहा शोर के बाद की शांति’। पूरे संग्रह के संदर्भ में यह प्रश्न है कि यह शोर किसका है? निश्चितरूपेण विभिन्न संस्थाओं के बीच स्व सजग व्यक्तित्व के संघर्ष का शोर है। मुक्ति भी उन्हीं संस्थाओं से चाहिए, जिनके भीतर वह जिंदगी भर फँसी रही। परिवार, पति, समाज इस प्रसंग में विभिन्न संस्थाओं का रूप धारण कर लेते। इससे इतर महिलाओं के प्रति हो रहे तमाम किस्म के अपराधों, ज्यादतियों के विरुद्ध व्यक्तित्व की सजगता है। यह मुक्ति की संपूर्णता का आख्यान है। यह सिर्फ देह की मुक्ति नहीं है। देह से इतर दैनंदिन जीवन का संघर्ष मुक्ति की आकांक्षा का आधार है। यह फौजियों की तरह कभी-कभार की लड़ाई नहीं है। यह रोज की लड़ाई-खुद से भी और दूसरों से भी। जैसे यह संघर्ष बहुस्तरीय है, वैसे ही कहानियों की संवेदनात्मक संरचना भी अनेक स्तरीय है। चित्रण में सपाटता नहीं है। क्रियाओं से, भावों से उपजी प्रतिक्रियाओं की आंतरिकता कहानियों को समृद्ध करती है। ये विभिन्न किस्म की अनेक स्तरीयताएँ पाठ के धरातल पर पाठक को संतुष्ट या आत्मसंतुष्ट नहीं होने देती। पाठ-पाठकों को अपनी यात्रा में सहभागी बनाता है। कहानियों की आंतरिकता को उसकी दार्शनिकता भी सुपुष्ट करती है। ये कहानियाँ कहानीकार के अंतर्विषयक समझ का स्पष्ट प्रमाण हैं। मनोविज्ञान, समाज और भाषा की गहरी समझ से युक्त ये कहानियाँ पठनीय और विचारणीय हैं।
In stock
Description
About the Author:
जन्म : 1 मई, 1959 को कोतमा, जिला शहडोल (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए. हिंदी और मनोविज्ञान कृतियाँ : ‘मैं शब्द हूँ’, ‘अनंत संभावनाओं के बाद भी’, ‘उठाता है कोई एक मुट्ठी ऐश्वर्य’ (कविता-संग्रह); ‘पहिंजी गोल्हा में’ (सिंधी कवितासंग्रह); ‘मुझे ही होना है बार-बार’, ‘अंदर के पानियों में कोई सपना काँपता है’, ‘उससे पूछो’, ‘मैं अपनी मिट्टी में खडी हूँ काँधे पे अपना हल लिये’, ‘अनकहा आख्यान’ (कहानी-संग्रह); बर्फ जा गुल’, ‘खामोशियों के देश में’ (सिंधी कहानी-संग्रह); ‘समन्दर में सूखती नदी’, ‘ये कथाएँ सुनायी जाती रहेंगी हमारे बाद भी’ (प्रतिनिधि कहानी-संग्रह); ‘तत्वमसि’, ‘कुछ न कुछ छूट जाता है’, ‘देह कुठरिया’ (उपन्यास); ‘मिठो पाणी खारो पाणी’ (यह उपन्यास सिंधी में भी प्रकाशित); ‘हिन शहर में हिकु शहर हो’ (सिंधी उपन्यास); ‘जे. कृष्णमूर्ति to हिमसेल्फ’ (हिंदी अनुवाद)। अन्य : ‘अंदर के पानियों में कोई सपना काँपता है’ पर ‘इंडियन क्लासिकल’ के अंतर्गत एक टेलीफिल्म का निर्माण। अनेक रचनाओं का अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, उड़िया, सिंधी, मराठी, बंगाली भाषाओं में अनुवाद। कई कहानियों के नाट्य रूपांतरण ऑल इंडिया रेडियो, दिल्ली से प्रसारित। सम्मान : मुक्तिबोध सम्मान, ‘मिठो पाणी खारो पाणी’ पर कुसुमांजलि सम्मान 2017, कथा क्रम सम्मान 2017, कहानियों पर गोल्ड मैडल… व कई अन्य छोटे-बड़े सम्मान।
Additional information
| ISBN | 9.78819E+12 |
|---|---|
| Author | Jaya Jadwani |
| Binding | Hardcover |
| Pages | 176 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |
| Imprint | Setu Prakashan |
| Language | Hindi |
You may also like…
-
Mizaj-E-Banaras : Banaras Ke Bunkar
₹450.00Original price was: ₹450.00.₹338.00Current price is: ₹338.00. -
RACHANA PRAKRIYA KE PADAV (Thought on Theatre Work) by Devendra Raj Ankur
₹499.00Original price was: ₹499.00.₹374.00Current price is: ₹374.00. -
Khoye Hue Logon Ka Shahar By Ashok Bhaumik
₹225.00Original price was: ₹225.00.₹169.00Current price is: ₹169.00. -
Durgawati : Garha Ki Parakrami Rani
₹380.00Original price was: ₹380.00.₹285.00Current price is: ₹285.00. -
Vaishvik Aatankawad Aur Bharat Ki Asmita By Ram Puniyani
₹399.00Original price was: ₹399.00.₹299.00Current price is: ₹299.00. -
Sabhyata Ke Kone By Ramachandra Guha
₹649.00Original price was: ₹649.00.₹487.00Current price is: ₹487.00. -
Jinna : Unki Safaltayein, Vifaltayein Aur Itihas Me Unki Bhoomika by Ishtiaq Ahmed
₹700.00Original price was: ₹700.00.₹525.00Current price is: ₹525.00. -
Hindi Sahitya Ke 75 Varsh : Nehru Yug Se Modi Yug Tak By Sudhish Pachauri
₹380.00Original price was: ₹380.00.₹285.00Current price is: ₹285.00. -
Hua Karte the Raadhe by Meena Gupta
₹375.00Original price was: ₹375.00.₹281.00Current price is: ₹281.00. -
Allah Naam Ki Siyasat – Hilal Ahmed
₹449.00Original price was: ₹449.00.₹337.00Current price is: ₹337.00. -
GHAR JAATE by Gulammohammed Sheikh
₹425.00Original price was: ₹425.00.₹319.00Current price is: ₹319.00. -
Muktibodh Ki Jeevani Combo Set – (2 Khand) – paperback
₹1,500.00Original price was: ₹1,500.00.₹1,125.00Current price is: ₹1,125.00. -
Bharat Se Kaise Gaya Buddh Ka Dharm By Chandrabhushan
₹395.00Original price was: ₹395.00.₹296.00Current price is: ₹296.00. -
Emergency Raj Ki Antarkatha By Anand Kumar
₹275.00Original price was: ₹275.00.₹206.00Current price is: ₹206.00. -
Lucknow : Nawabi-badshahi Kaal Aur 1857 Ki Kranti Ki Gatha By Rajgopal Singh Verma
₹625.00Original price was: ₹625.00.₹469.00Current price is: ₹469.00.
Related products
-
Theatre By Ramesh Chander Shah
₹160.00Original price was: ₹160.00.₹120.00Current price is: ₹120.00. -
Patthalgadi Aur Anay Kahaniyan by Kamlesh
₹475.00Original price was: ₹475.00.₹356.00Current price is: ₹356.00. -
-




Reviews
There are no reviews yet.