Description

मातृभाषा में कवि नवल शुक्ल का तीसरा कविता संग्रह है। प्रतिबद्धता और प्रगतिशील चेतना के बावजूद इनकी कविताओं में वाचालता या तीखापन नहीं है। मातृभाषा में की कविताएँ अपनी संरचना के भीतर एक यात्रा तय करती हैं। यह यात्रा कथन से विचार, विचार से जीवन और बोध तक की यात्रा है। संभवतः इसी कारण यह यात्रा अक्सर एक सामान्य कथन से प्रारम्भ होकर संवाद, आह्वान, वर्णन, विवरण के सहारे गहराई पाती है। ऊपर से दिखती सरलता इस यात्रा के कारण गहरी और बहुस्तरीय ही नहीं बनती, संश्लिष्ट और सांद्र भी बनती है।

About the Author:

नवल शुक्ल 90 के दशक के बहुचर्चित व महत्त्वपूर्ण कवि हैं। दसों दिशाओं में, इस तरह एक अध्याय, और मातृभाषा में सहित अब तक इनके तीन कविता संग्रह और एक उपन्यास तिलोका वायकान प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही वे कथा लेखन व संपादन के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहे हैं।

Additional information

ISBN

9.78939E+12

Author

Naval Shukla

Binding

Paperback

Pages

180

Publication date

01-06-2022

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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