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ROZNAMCHA By Nemichandra Jain Edited By Kirti Jain

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ROZNAMCHA By Nemichandra Jain Edited By Kirti Jain

रोज़नामचा — नेमिचन्द्र जैन

आज साठ वर्ष जीवन के पूरे हो गये। दूसरा किनारा पास आने लगा। क्या पता कितना पास है। शायद दो-चार वर्ष या और भी कम या शायद दस-पन्द्रह। क्या किया गया इस जिंदगी में, इस जिदगी के साथ, इसके द्वारा? बहुत गर्व या सन्तोष के लायक कुछ नहीं है। कभी-कभी लगता है सम्भावनाएँ बहुत ज्यादा थीं, उन्हें गंवा दिया। पर फिर यह भी बहुत बार लगता है कि यह केवल अहंकार ही है। जो कुछ हुआ वही थी सम्भावना ऋण और धन का समग्र पुंज। उसमें से इससे अधिक कुछ नहीं निकल सकता था। और अब? यह जो बाकी समय है-जितना भी है-उसका क्या बन सकता है? उसका भी शायद कुछ खास नहीं। जितना जैसा कुछ किया गया है उसमें एक आध बूंद और, बस। क्या यह सन्तोष कर सकता हूँ कि अपने बच्चों के लिए अगर बहुत कुछ गर्वयोग्य नहीं छोड़ा तो ऐसा भी कुछ नहीं जिसके लिए उन्हें लब्जा हो या खेद हो। शायद वे लोग प्यार और ममता के साथ ही याद रख सकें।    

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About the Author:

नेमिचन्द्र जैन 16 अगस्त 1919 – 24 मार्च 2005 कवि, समालोचक, नाट्य-चिन्तक, सम्पादक, अनुवादक, शिक्षक । 1959-76 राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में वरिष्ठ प्राध्यापक । 1976-82 जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कला अनुशीलन केन्द्र के फैलो एवं प्रभारी अँग्रेजी दैनिक स्टेट्समैन और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के नाट्य-समीक्षक, दिनमान तथा नवभारत टाइम्स के स्तम्भकार, रंगमंच की विख्यात पत्रिका नटरंग के संस्थापक-सम्पादक एवं नटरंग प्रतिष्ठान के संस्थापक- अध्यक्ष कविताएँ : तार सप्तक (1944), एकान्त (1973) अचानक हम फिर (1999)। आलोचना : अधूरे साक्षात्कार (उपन्यास-समीक्षा, 1966, 1989), रंगदर्शन (रंगमंचीय विवेचन, 1967, 1983, 1993, 1998), बदलते परिप्रेक्ष्य (कविता और आलोचना सम्बन्धी निबन्ध, 1968), जनान्तिक (आलोचनात्मक निबन्ध, 1981), पाया पत्र तुम्हारा (मुक्तिबोध के साथ पत्र-व्यवहार, 1984), भारतीय नाट्य परम्परा (1989), दृश्य अदृश्य (संस्कृति और रंगमंच सम्बन्धी निबन्ध, 1993), रंग परम्परा (1996), रंगकर्म की भाषा (1996), मेरे साक्षात्कार (1998), इंडियन थिएटर (अँग्रेज़ी में भारत की नाट्य परम्परा का विवेचन, 1992), तीसरा पाठ 1998, असाइड्स (अँग्रेज़ी में) 2003 । सम्पादन: मुक्तिबोध रचनावली, 6 खण्ड (1980, 1985, 1998), मोहन राकेश के सम्पूर्ण नाटक (1993) समेत अनेक पुस्तकों का सम्पादन । अनुवाद : नाटक, उपन्यास, कविता, समालोचना, समाजशास्त्र, दर्शन, राजनीति, इतिहास सम्बन्धी अनेक ग्रन्थ । सम्मान : पद्मश्री सम्मान, भारत सरकार (2003), शलाका सम्मान, दिल्ली सरकार (2005) संगीतनाटक अकादमी पुरस्कार (1999-2000) समेत अन्य अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित ।

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