Description
‘तिमिर में ज्योति जैसे’
संपादक: प्रो. अरुण होता
कोरोनाकाल की प्रभावी अभिव्यक्तियों को सहेजने वाले आगामी संचयन से श्रृंखला स्वरूप कुछ काव्यांश और…
कोरोना कविता श्रृंखला 8
सपने में निकल पड़ता हँ- लीलाधर मंडलोई
Timir mai jyoti jaise – Arun Hota
तिमिर में ज्योति जैसे – अरुण होता
कोरोना विगत कुछ समय से पूरी दुनिया में फैली एक महामारी है। मानवता और मनुष्य ने, सामूहिक रूप से, व्यापक संदर्भो में विगत लगभग सौ वर्षों में ऐसा संकट नहीं झेला है। इस महामारी ने सिर्फ व्यक्ति को उसके निजी संदर्भो में ही नहीं, सभ्यता के दीर्घकालिक सूत्रों, विचारों, प्रसंगों, व्यवहारों को भी क्षत-विक्षत किया है।
In stock
‘तिमिर में ज्योति जैसे’
संपादक: प्रो. अरुण होता
कोरोनाकाल की प्रभावी अभिव्यक्तियों को सहेजने वाले आगामी संचयन से श्रृंखला स्वरूप कुछ काव्यांश और…
कोरोना कविता श्रृंखला 8
सपने में निकल पड़ता हँ- लीलाधर मंडलोई
| ISBN | 9.78939E+12 |
|---|---|
| Author | Arun Hota |
| Pages | 263 |
| Publisher | Setu Prakashan Samuh |
| Imprint | Setu Prakashan |
| Language | Hindi |











Reviews
There are no reviews yet.